Chapter 5

पोर्टिको के नीचे पार्किंग मना है

शनिवार, सुबह 9:40। वाया डेल’इंडिपेंडेंत्सा।

मारेशियाल्लो आल्दो मोरेत्ती के काराबिनिएरी में चौदह दिन बचे थे, और उसने ये दिन एक कुर्सी पर बिताने का प्लान बनाया था।

उसकी जगह वो सुबह की गीली रोशनी में वाया डेल’इंडिपेंडेंत्सा पर खड़ा था, हाथ में एस्प्रेसो का काग़ज़ी कप जो ठंडा हो चुका था, और एक औरत को अपनी गाड़ी का पार्किंग चालान काटते देख रहा था।

“आप ऐसा नहीं कर सकतीं,” काराबिनिएरे वान्नी बोला।

“कर रही हूँ,” औरत बोली। उसने ऊपर नहीं देखा। उसने शहर की पुलिस, पोलित्सिया लोकाले, की गहरी नीली वर्दी पहनी थी, सफ़ेद टोपी और नाम का बिल्ला जिस पर लिखा था त्सुक्की। वो छोटे, सख़्त बड़े अक्षरों में लिख रही थी। “दो पहिये फ़ुटपाथ पर। आगे का बंपर एक संरक्षित पोर्टिको के नीचे। कोई परमिट नहीं दिख रहा।”

“ये काराबिनिएरी की गाड़ी है।”

“दिख रहा है। साइड पर लिखा है।”

“हम एक कॉल पर हैं।”

“तो आप चालान के साथ कॉल पर हैं।”

निकोलो वान्नी चौबीस साल का था और तीन हफ़्ते पहले रोम से भेजा गया था। उसकी पीठ बहुत सीधी थी और वर्दी बहुत साफ़। वो मोरेत्ती की तरफ़ मुड़ा।

“मारेशियाल्लो। इन्हें बताइए।”

मोरेत्ती ने ठंडा एस्प्रेसो पिया। वो घटिया था। उसने फिर भी ख़त्म किया, क्योंकि चौंतीस साल की नौकरी में उसने सीखा था कि एस्प्रेसो वो वादा है जो दिन तुमसे करता है, और दिन ने वादा तोड़ दिया तो इसका मतलब ये नहीं कि तुम भी तोड़ दो।

“ऑफ़िसर त्सुक्की,” उसने कहा।

“मारेशियाल्लो।”

“बारिश हो रही थी। हमने वहाँ पार्क किया जहाँ सूखा था।”

“पूरा शहर वहाँ पार्क करता है जहाँ सूखा हो, मारेशियाल्लो। इसीलिए तो हमारे पास पोर्टिको हैं। वो लोगों के लिए हैं।” उसने चालान फाड़ा और आगे बढ़ाया। “गाड़ियों के लिए नहीं। उन गाड़ियों के लिए भी नहीं जिनकी साइड पर कुछ लिखा हो।”

“पोर्टिको किसका है?” वान्नी बोला।

त्सुक्की ने पहली बार उसे ठीक से देखा। “क्या?”

“पोर्टिको। ये ढका रास्ता। किसका है? क्योंकि मेरी समझ में पोर्टिको इमारत का होता है। वो निजी संपत्ति है। जनता को बस उसमें से गुज़रने का हक़ है। तो अगर पोर्टिको निजी है, तो उसमें क्या पार्क होता है इस पर शहर का कोई अधिकार नहीं, और इसलिए…”

“आप कहाँ से हैं?”

“रोम से।”

“ज़ाहिर है।” त्सुक्की ने चालान ख़ुद ही वाइपर के नीचे दबा दिया। “पोर्टिको इमारत का है। पोर्टिको का इस्तेमाल शहर का है। 1288 से यही क़ानून है। आपको 1288 से बहस करनी है तो अंदर जाइए और कंसीयर्ज से बहस कीजिए। सुना है उसने इसी में डॉक्टरेट की है।”

उसके पीछे, होटल बेला विस्ता के काँच के दरवाज़ों के उस पार, कोई वाइन को लेकर चीख़ रहा था।

कॉल नौ बजकर छह मिनट पर आई थी। जीनो रॉसी नाम का एक आदमी, इक्यासी साल, दो अपराधों की रिपोर्ट कर रहा था: एक तोहफ़े की चोरी, और एक दूल्हे की चोरी।

“शादी के दिन दूल्हा चोरी नहीं होता,” मोरेत्ती ने गाड़ी में वान्नी से कहा था। “शादी के दिन दूल्हा सोच रहा होता है। लंच तक लौट आएगा, और शर्मिंदा होगा, और दादा उस पर चिल्लाएँगे, और हम घर चले जाएँगे।”

“और तोहफ़ा?”

“तोहफ़ा तोहफ़ा है। किसी ने इधर-उधर रख दिया। शादी वाले होटल में हर चीज़ इधर-उधर होती है।”

अब मोरेत्ती होटल के दरवाज़े पर खड़ा अंदर देख रहा था, और उसे लगने लगा था कि उसके आख़िरी चौदह दिनों में से ये वाला दिन किसी कुर्सी पर नहीं बीतेगा।

लॉबी भरी हुई थी। उसमें तीस या उससे ज़्यादा लोग थे, आधे शादी के कपड़ों में और आधे नाश्ते के, और सब गला फाड़कर बोल रहे थे। दादा को वो आसानी से पहचान सकता था, एक छोटा-सा बूढ़ा आदमी, बड़ी आवाज़ और बीप करती कलाई वाला। उनके सामने हरे कपड़ों में एक औरत हैंडबैग को हथियार की तरह पकड़े थी। उनके चारों तरफ़ रिश्तेदार तहख़ाने, चाबी, दूल्हे, तोहफ़े, नेपल्स, और सॉस नाम की किसी चीज़ के बारे में चिल्ला रहे थे।

मोरेत्ती देख ही रहा था कि सड़क से दो आदमी अंदर आए।

उसका ध्यान उन पर इसलिए गया क्योंकि उनमें से एक ने सरसों-पीला सूट पहना था, और सरसों-पीले सूट पर ध्यान न जाना मुश्किल है। दूसरा लंबा और थका हुआ था और उसकी बाँहों पर एक कोट तह करके रखा था, जैसे उसके नीचे कोई भारी, गोल चीज़ उठाए हो। वो दरवाज़े पर मोरेत्ती के पास से गुज़रे। सूट वाला दूसरे से फुसफुसा रहा था।

“हम इसे वापस रखेंगे। सही डिब्बा उठाएँगे। निकल जाएँगे। भूल सुधारना, लेओ, अपराध का सबसे ऊँचा रूप है।”

“अंदर चालीस लोग हैं।”

“और भी अच्छा। भीड़ में कोई कुछ नहीं देखता।”

मोरेत्ती ने उन्हें अंदर जाते देखा। उसने सोचा: ये सूट मैं जानता हूँ। फिर त्सुक्की ने 1288 के बारे में कुछ कहा, और वो वापस गाड़ी की तरफ़ मुड़ गया।

“मारेशियाल्लो,” एक पल बाद वान्नी बोला, बदली हुई आवाज़ में।

“क्या।”

“झूमर।”

मोरेत्ती फिर मुड़ा।

होटल बेला विस्ता का झूमर पीतल और काँच की एक बड़ी चीज़ था, मोमबत्ती की लौ जैसे तीस छोटे बल्बों वाला। वो ऊपर जा रहा था।

वो झूल नहीं रहा था। वो उठ रहा था, धीरे-धीरे और बिना झटके, वैसे जैसे कोई बच्चा ग़ुब्बारा छोड़ दे तो वो उठता है, और उसकी ज़ंजीर उसके नीचे ढीली होकर लपेटों में मुड़ रही थी। क्रिस्टल की बूँदें बाँहों से अलग होकर उनसे थोड़ा ऊपर तैर रही थीं, घूमती हुईं और रोशनी पकड़ती हुईं।

उसके नीचे चीख़-पुकार और तेज़ हो गई।

“ये लैम्ब्रुस्को है,” बैंगनी बालों वाली एक औरत कह रही थी। उसने अपना हाथ सिर पर सपाट रखा था, बाल थामे हुए। “मैंने कहा था। डिनर पर कहा था, बोतल ख़राब थी, सिर पर चढ़ जाती है, देखो…”

“कार्ला, मैं ज़मीन से ऊपर हूँ! मेरे जूते देखो!”

मोरेत्ती ने जूते देखे। वो ज़मीन से ऊपर थे। उनके बग़ल वाले जूते भी। रॉसी परिवार की बुआओं की एक पूरी क़तार कोई तीन सेंटीमीटर ऊपर उठ गई थी, और कुछ नहीं पर खड़ी बहस कर रही थी, उनके हैंडबैग धीरे-धीरे उनकी कोहनियों के पास ऊपर तैर रहे थे।

कमरे के बीचोबीच सरसों वाले सूट वाला आदमी चलते-चलते रुक गया था। कोट वाला लंबा आदमी उसके पीछे रुक गया था। कोट के नीचे से, उसकी बाँहों के बीच से, गर्म ईंट के रंग की एक रोशनी निकल रही थी।

“अराजकतावादी,” वान्नी बोला।

“क्या?”

“ये कोई डिवाइस है। अराजकतावादियों का डिवाइस। मारेशियाल्लो, वो शादी को निशाना बना रहे हैं। वाइन, चाबी, ग़ायब दूल्हा। ये एक मुहिम है। बोलोन्या की एक पारिवारिक संस्था के ख़िलाफ़ एक सोची-समझी मुहिम।”

गोल चश्मे और लिनन की जैकेट वाला एक आदमी फ़ुटपाथ पर उनके बग़ल में रुक गया था। उसकी बग़ल में एक अख़बार दबा था। उसने काँच के पार तैरते झूमर और तैरती बुआओं को गहरी, शांत दिलचस्पी से देखा।

“ज़ाहिर है,” उसने किसी से नहीं कहा। “होटल की लॉबी, झूठी ऊँचाई के एक स्पेस के रूप में। ये सजावट की आलोचना है।”

“आप कौन हैं?” त्सुक्की बोली।

“मैं पढ़ाता हूँ,” आदमी ने कहा, और आगे बढ़ गया।

अंदर सरसों वाले सूट वाला आदमी लॉबी के पीछे की तरफ़ पहुँचने की कोशिश कर रहा था, फ़्रंट डेस्क के पीछे वाले एक दरवाज़े की तरफ़। दादा और हरे कपड़ों वाली औरत ठीक उसके रास्ते में खड़े एक-दूसरे के मुँह पर चिल्ला रहे थे। उसने बाएँ से कोशिश की, फिर दाएँ से। हर तरफ़ रिश्तेदार थे। लंबे आदमी ने एक बार सिर हिलाया।

वो मुड़े और बाहर निकल आए।

वो दरवाज़े पर फिर ठीक मोरेत्ती के पास से गुज़रे। लंबा आदमी अपना कोट बहुत कसकर पकड़े था। सूट वाले को इतना पसीना आ रहा था कि उसका कॉलर गहरा पड़ गया था।

“स्थिति,” वो फुसफुसा रहा था, “विकसित हो गई है।”

जैसे ही वो बाहर सड़क पर आए, लॉबी चुप हो गई। अंदर सबने एक साथ बोलना बंद कर दिया था, ऊपर देखने के लिए। तीस लोग, पूरी ख़ामोशी में, एक झूमर को घूरते हुए।

ख़ामोशी में झूमर नीचे आया। वो धीरे से नीचे आया, पूरा, और उसकी ज़ंजीर सीधी हुई, और वो एक हल्की क्लिक के साथ अपने हुक पर बैठ गया, और क्रिस्टल की हर बूँद अपनी जगह लौट आई। बुआएँ भी उसके साथ नीचे आईं। बैंगनी बालों वाली पहले उतरी, और लड़खड़ाई, और मख़मल की एक कुर्सी पर बैठ गई।

“ख़राब बोतल,” उसने कहा।

“मारेशियाल्लो,” वान्नी बहुत धीमे से बोला। “आपने देखा?”

“देखा।”

“हम क्या करेंगे?”

मोरेत्ती ने होटल को देखा। उसने अपने वाइपर के नीचे दबे चालान को देखा। उसने त्सुक्की को देखा, जो अब तक एक और चालान लिख रही थी, एक डिलीवरी वैन का।

“पहले,” उसने कहा, “मैं पता लगाऊँगा कि वो पोर्टिको किसका है।”

वो असल में ख़ुद को सुन नहीं रहा था। वो लॉबी के बग़ल में एक दूसरे काँच के दरवाज़े से नाश्ते का कमरा देख रहा था। हाइकिंग सैंडल पहने एक बहुत लंबा मेहमान बुफ़े के पास प्लेट में एक क्रोसाँ लिए खड़ा था। जैसे ही वो दोनों आदमी निकले, लंबे मेहमान ने प्लेट नीचे रख दी, सावधानी से, क्रोसाँ बिना छुए।

फिर उसने एक नैपकिन से उँगलियाँ पोंछीं, नैपकिन को एक साफ़-सुथरे चौकोर में तह किया, और उनके पीछे बाहर चला गया।

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