Chapter 1

आइटम 1,113

शुक्रवार, रात 11:52। होटल बेला विस्ता, वाया डेल’इंडिपेंडेंत्सा।

दारियो लेंत्सी के पास मध्यकालीन क़ानून में डॉक्टरेट थी, चार मोमबत्तियाँ थीं, और रात की एक शिफ़्ट थी जिसमें घंटे के ग्यारह यूरो मिलते थे।

तूफ़ान ने 11:40 पर बिजली उड़ा दी थी। अब होटल बेला विस्ता की लॉबी किसी छोटे गिरजाघर की तरह रोशन थी, और दारियो फ़्रंट डेस्क के पीछे एक लेख लिए बैठा था जिसे वो कई बार पढ़ चुका था, एक ऐसे सवाल के बारे में जो उसे बहुत पसंद था।

सन 1290 में बोलोन्या के बाहर एक खेत पर आसमान से एक पत्थर गिरा। किसान ने कहा पत्थर उसका है। बिशप ने कहा वो भगवान का है, और इसलिए बिशप का। किसान के पड़ोसी ने कहा वो उसका है, क्योंकि पत्थर उछला था। मुक़दमा नौ साल चला।

दारियो उछाल तक पहुँचा ही था कि सामने का दरवाज़ा खुला।

पहले बारिश अंदर आई। फिर नोन्नो जीनो रॉसी अंदर आए, इक्यासी साल के और हड्डियों तक भीगे हुए, जैकेट में लिपटी कोई चीज़ ऐसे उठाए जैसे कोई आदमी बच्चे को उठाता है।

“डॉक्टर साहब,” जीनो बोले।

“मिस्टर रॉसी। आप तो भीग गए।”

“पता है मैं भीग गया हूँ। मैं पियाज़्ज़ा माज्जोरे से भीगा हुआ हूँ। मेरी बहन ने टैक्सी नहीं ली। कहती है टैक्सी उसकी टाँगों की बेइज़्ज़ती है।” उन्होंने गठरी डेस्क पर रख दी। डेस्क बहुत धीमे-धीमे भिनभिनाने लगा। “किसी से ये गिर गया। पोर्टिको के नीचे, दवा की दुकान के बाहर। बारिश में अनाथ की तरह बैठा था।”

“क्या गिर गया?”

“शादी का तोहफ़ा।”

दारियो ने जैकेट को देखा। “आपको कैसे पता कि ये शादी का तोहफ़ा है?”

“कल मेरी पोती की शादी है। मेरा आधा परिवार इसी होटल में ऊपर सो रहा है। दरवाज़े से सौ मीटर दूर सड़क पर एक ख़ूबसूरत चीज़ पड़ी है।” जीनो ने हाथ फैलाए। “डॉक्टर साहब। मैं बूढ़ा हूँ। बेवकूफ़ नहीं।”

दारियो ने जैकेट हटाई।

वो एक गोला था, क़रीब-क़रीब पानेत्तोने जितना बड़ा, गहरे ताँबे और धारीदार काँच के खोल में। काँच के पीछे कुछ गहरे अंबर-लाल रंग में दहक रहा था, वैसे जैसे अंगारे दहकते हैं जब कोई उन पर फूँक नहीं मार रहा होता। दारियो ने उस पर दो उँगलियाँ रखीं। वो गर्म था, अभी-अभी निकली रोटी की तरह।

“कारीगरी देखो,” जीनो बोले। “किसी ने पैसा ख़र्च किया है।”

“कोई कार्ड नहीं है।”

“कार्ड उड़ गया। तूफ़ान है।”

“कोई रिबन नहीं है।”

“रिबन उड़ गया। डॉक्टर साहब, आप सुन रहे हैं? तूफ़ान है।” जीनो धम से लॉबी के सोफ़े पर बैठ गए, और सोफ़े ने आह भरकर पानी छोड़ा। “क्या रात है। रिहर्सल डिनर। पता है उन्होंने क्या परोसा? मोडेना की वाइन। बोलोन्या की शादी में। और फिर दूल्हे की माँ, बहुत भली औरत, बहुत तहज़ीब वाली, वेटर से पूछती है, बिना मीट का कुछ है?”

“रिहर्सल डिनर में?”

“बोलोन्या में!” जीनो की आवाज़ छत तक गई और वहीं टिक गई। “बिना मीट का कुछ है। मुझे लगा वेटर मर जाएगा। मुझे लगा मैं मर जाऊँगा। मेरी बहन बोली ये नेपल्स से आई लंबी ट्रेन बोल रही है, और मैंने कहा, कार्ला, ट्रेन सब्ज़ियाँ नहीं माँगती…”

डेस्क पर दारियो का पेन लकड़ी से ऊपर उठ गया।

वो उसकी आँखों की ऊँचाई तक उठा और वहीं रुक गया, किसी चीज़ की तरफ़ इशारा नहीं करता हुआ, थोड़ा-थोड़ा घूमता हुआ, जैसे कोई मछली तय कर रही हो कि किधर जाए।

दारियो ने पेन को देखा।

“…और फिर मेरी बहन कहती है, जीनो, तुम चिल्ला रहे हो, और मैं कहता हूँ, मैं चिल्ला नहीं रहा, ये मेरी आवाज़ है, ये आवाज़ मेरे पास इक्यासी साल से है…”

जीनो रुक गए। उन्होंने पलकें झपकाईं, और एक कान मला।

“…और फिर मेरी बहन कहती है, जीनो, तुम चिल्ला रहे हो,” उन्होंने फिर कहा, ठीक उसी आवाज़ में, हाथ हवा में ठीक वैसे ही, “और मैं कहता हूँ, मैं चिल्ला नहीं रहा…”

उन्हें जैसे पता ही नहीं था कि उन्होंने ये दो बार कहा है। दारियो को पता था। उसने बिना चाहे इसे गिन लिया, जैसे वो गिरजाघर की घंटियाँ गिनता था। चार सेकंड। वही चार सेकंड, दो बार।

जीनो की कलाई पर कोई चीज़ बीप करने लगी।

“ये,” जीनो बोले, और कलाई ऊपर उठाई। स्लेटी प्लास्टिक का पट्टा। एक छोटी-सी स्क्रीन। “मेरे डॉक्टर ने लगाया है। जब मुझे ग़ुस्सा आता है तो बीप करता है। सारा दिन बीप करता है। इटली की सबसे बेवकूफ़ मशीन है।”

दारियो ने हाथ बढ़ाकर पेन को छुआ। वो गिरा नहीं। वो उसकी उँगली से थोड़ा दूर हटा, और फिर लौट आया, तमीज़ से।

“ख़ैर,” जीनो ने बहुत धीमे से कहा। उन्होंने चेहरा मला। “ख़ैर। देर हो गई है।”

पेन नीचे आया। वो धीरे-धीरे नीचे आया, किसी पत्ते की तरह, और डेस्क पर ठीक वहीं लेट गया जहाँ पहले था।

दारियो ने उसे उठाया। वो एक पेन था। उसने अपने लेख के हाशिये पर लिखा: पेन: उठा। पेन: उतरा। मिस्टर रॉसी: चार सेकंड, दो बार। फिर उसने दराज़ से काग़ज़ का एक टैग निकाला।

“मैं इसे खोया-पाया में रख देता हूँ,” उसने कहा। “अगर कोई इसे लेने आए…”

“कोई लेने नहीं आएगा। ये हमारा है। लिखो ‘रॉसी’।”

दारियो ने लिखा रॉसी।

“लिखो ‘शादी का तोहफ़ा’।”

दारियो ने लिखा शादी का तोहफ़ा।

“बढ़िया। कल मैं पता लगाऊँगा कि किस कज़िन ने भेजा है, और उसका ठीक से शुक्रिया अदा करूँगा, और फिर उससे कभी बात नहीं करूँगा, क्योंकि पोर्टिको के नीचे तोहफ़ा कौन छोड़ता है?” जीनो खड़े हो गए। उन्होंने अपनी गीली जैकेट वापस ली और उसे झटका। “क़ानून में, डॉक्टर साहब, मिली हुई चीज़ किसकी होती है?”

“सदी पर निर्भर करता है।”

“बोलोन्या में। आज रात।”

दारियो ने किसान और बिशप और पड़ोसी के बारे में सोचा।

“उसकी जो उसे लेकर सबसे ज़्यादा परेशान हो,” उसने कहा।

“बिल्कुल,” जीनो बोले, और अँधेरे में सीढ़ियाँ चढ़ गए।

उनके जाने के बाद दारियो कुछ देर टैग को देखता रहा। फिर उसने तोहफ़ा के बाद एक सवाल का निशान लगाया, और उसके नीचे, छोटे अक्षरों में, गर्म।

वो गोले को पीछे वाले ऑफ़िस में ले गया, उसे एक बच्चे के जूते और ग्यारह छतरियों के बीच शेल्फ़ पर रखा, और वो बड़ी हरी किताब खोली जिसमें वो हर वो खोई हुई चीज़ दर्ज करता था जो होटल ने कभी रखी थी।

आइटम 1,113, उसने लिखा। एक गोला। ताँबा और काँच। गर्म। भिनभिनाता है। शायद एक तोहफ़ा। शायद हीटिंग सिस्टम।

रात 1:10 पर सामने का दरवाज़ा फिर खुला।

जो आदमी अंदर आया वो बहुत लंबा था। उसके पास एक बड़ा बैकपैक था, एक रेन जैकेट, और हाइकिंग वाली सैंडल, और हालाँकि बाहर की सड़क नदी बनी हुई थी, सैंडल बिल्कुल साफ़ थीं। उसने मोमबत्तियों से रोशन लॉबी को वैसे देखा जैसे लोग किसी म्यूज़ियम को देखते हैं।

“शुभ संध्या,” उसने कहा। “मेरे पास आरक्षण नहीं है। मैं एक करवाना चाहूँगा। अभी के लिए।”

“ज़रूर। आपका नाम?”

“सांद्रो मोज़र। बोल्ज़ानो से।” उसने डेस्क पर एक पहचान-पत्र रखा। वो बिल्कुल नया था। उसमें से अब भी मशीन की गंध आ रही थी। “मैं यहाँ भोजन के लिए आया हूँ।”

“आप सही शहर में आए हैं।”

“मुझे ज्ञात है।” उसने ये गंभीरता से कहा, जैसे दारियो ने किसी पाठ्यपुस्तक का कोई तथ्य पक्का कर दिया हो। “मुझे नाश्ते के लिए स्थानों की एक सूची भी चाहिए होगी। ऐसे स्थान जो ऋतुओं का सम्मान करते हों।”

दारियो ने, जिसकी राय बड़ी पक्की होती थी, उसके लिए एक लिस्ट लिख दी। सांद्रो ने उसे पढ़ा और हर लाइन पर सिर हिलाया, और चौथी लाइन पर उसने एक पल के लिए आँखें बंद कर लीं, जैसे दर्द हो रहा हो।

“यहाँ अपना जैम स्वयं बनाते हैं?”

“पहाड़ियों के फलों से।”

“धन्यवाद।” उसने लिस्ट को एक प्लास्टिक के कवर में मोड़कर रखा और सीने वाली जेब में डाल लिया, दिल के ऊपर। “एक प्रश्न और। क्या किसी ने कोई ऐसी वस्तु जमा कराई है जो गिरी हो?”

दारियो को 1290 वाला पत्थर याद आया।

“कहाँ से गिरी हो?”

आदमी ने उसे देखा। “ऊपर से।”

दारियो के पीछे, ऑफ़िस के दरवाज़े के उस पार, भिनभिनाहट चलती रही, इतनी धीमी कि पक्का कहा न जा सके।

“खोया-पाया गोपनीय होता है,” दारियो ने कहा।

“गोपनीय।”

“ये मिल्कियत का सवाल है। अगर आपकी कोई चीज़ खोई है, तो आप मुझे बताते हैं कि वो क्या है, और साबित करते हैं कि वो आपकी है। फिर मैं आपको बताता हूँ कि वो हमारे पास है या नहीं। दावा करने वाले को अपना हक़ साबित करना होता है। रोमन ज़माने से यही होता आया है।”

“रोमन।”

“हाँ।”

“मैंने रोमनों के विषय में पढ़ा है।” सांद्रो ने एक पल के लिए ऑफ़िस के दरवाज़े को देखा। फिर उसने दारियो को फिर देखा, और मुँह बंद रखकर मुस्कुराया। “मैं साबित नहीं कर सकता कि वो मेरी है।”

“तो फिर क़ानूनन मैं आपको नहीं बता सकता कि वो हमारे पास है या नहीं।”

“मैं समझता हूँ,” सांद्रो ने कहा। “ये पूर्णतः उचित है।” उसने अपनी चाबी ली। सीढ़ियों के नीचे वो मुड़ा। “ट्रात्तोरिया कितने बजे खुलते हैं?”

“डिनर के लिए? आठ बजे। कुछ साढ़े सात बजे।”

सांद्रो ने अपनी घड़ी देखी।

“वो उन्नीस घंटे हैं,” उसने कहा, और ऊपर चला गया।

दारियो मोमबत्तियों के साथ बहुत देर बैठा रहा। बाहर तूफ़ान मीनारों के ऊपर से पूरब की तरफ़ खिसक गया। बारिश धीमी हुई। गरज कम आने लगी।

ऑफ़िस के दरवाज़े के नीचे अंबर रोशनी की एक पतली लकीर थी। वो एक जैसी नहीं थी। हर बार जब शहर पर गरज टूटती, लकीर और तेज़ हो जाती, और जब गरज रुकती, वो धीरे-धीरे फिर मद्धम हो जाती, जैसे कोई चीज़ फिर से सोने के लिए करवट ले रही हो।

दारियो ने हरी किताब खोली और आइटम 1,113 के नीचे एक लाइन और लिखी।

गरज का जवाब देता है।

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