दुल्हन लिस्ट बनाती है
शनिवार, सुबह 8:30। होटल बेला विस्ता।
जूलिया रॉसी ने दिन का पूरा प्रोग्राम अपने बाएँ हाथ की पीठ पर नीले पेन से लिख लिया था, क्योंकि काग़ज़ खो जाता है और हाथ नहीं खोते।
बाल 10. फूल 12. फ़ोटो 3. चर्च 4. 4 से पहले रोना नहीं।
8:30 पर उसने मात्तेओ को उसकी टाई देने के लिए कमरा नंबर 14 का दरवाज़ा खटखटाया, और किसी ने जवाब नहीं दिया।
उसने फिर खटखटाया। उसने दरवाज़े के उस पार उसका नाम लिया, ज़ोर से नहीं, वैसे जैसे किसी सोते हुए का नाम लिया जाता है। फिर वो नीचे डेस्क पर गई, जहाँ दिन वाला कंसीयर्ज रात वाले कंसीयर्ज को जगाने की कोशिश कर रहा था, और उसने फ़ालतू चाबी ले ली।
कमरा साफ़-सुथरा था। मात्तेओ साफ़-सुथरा इंसान था। उसका सूट अलमारी के दरवाज़े पर अपने कवर में टँगा था। उसके अच्छे जूते उसके नीचे खड़े थे, बग़ल-बग़ल। उसका फ़ोन बिस्तर के बीचोबीच पड़ा था, सीधा, स्क्रीन पर उसकी माँ के ग्यारह मैसेज।
मात्तेओ वहाँ नहीं था।
तकिये पर कल रात के डिनर का एक काग़ज़ी नैपकिन था। कोने में होटल का नाम छपा था, और उसके नीचे, मात्तेओ की छोटी लिखावट में:
जूलिया, एक बात है जो मैं
बस इतना। पेन रुक गया था।
जूलिया ने उसे चार बार पढ़ा। उसने उसे पलटा। पीछे कुछ नहीं था। उसने उसे खिड़की की तरफ़ ऊपर उठाया, जैसे बाक़ी वाक्य काग़ज़ में कहीं छिपा हो। फिर उसने उसे एक बार मोड़ा, अपने ड्रेसिंग गाउन की जेब में रखा, और अपने हाथ पर, 4 से पहले रोना नहीं के नीचे, लिखा:
म. को ढूँढ़ो।
रसोई लॉबी के नीचे थी, और उसमें बहुत शोर था।
“वाइन नहीं है,” शेफ़ ने कहा। वो ब्रूनो नाम का एक भारी-भरकम आदमी था, और उसने ये ऐसे कहा जैसे डॉक्टर बुरी ख़बर देते हैं, उसके कान के ठीक पीछे किसी जगह को देखते हुए। “एक बोतल भी नहीं। न लंच के लिए, न रिसेप्शन के लिए। कुछ नहीं।”
“होटल में तहख़ाना है।”
“होटल में तहख़ाना है जिसमें चार हज़ार बोतलें हैं। और दरवाज़े पर ताला है। और चाबी ग़ायब है।” ब्रूनो ने सीढ़ियों के पास दीवार पर लगी एक खूँटी की तरफ़ इशारा किया। खूँटी ख़ाली थी। “वहाँ टँगी रहती है। तीस साल से वहाँ टँगी रहती है। आज सुबह, चाबी नहीं।”
“दूसरी किसके पास है?”
“मालिक के पास। मालिक सार्डीनिया में हैं।” ब्रूनो ने हाथ उठाए। “आपके दादाजी को पहले से पता है।”
“दादाजी को कैसे पता?”
ऊपर से, छत के पार, एक ऐसी आवाज़ आई जैसे कोई छोटी-सी जंग शुरू हो रही हो।
“ऐसे,” ब्रूनो ने कहा।
होटल बेला विस्ता की लॉबी में संगमरमर का फ़र्श था, एक लाल क़ालीन, मख़मल की आठ कुर्सियाँ, और एक झूमर जिसका ज़िक्र मालिक ने वेबसाइट पर तीन बार किया था। 8:50 पर उसमें रॉसी परिवार के तेईस लोग और एस्पोज़ितो परिवार के दस लोग भी थे, और सब एक साथ बोल रहे थे।
एस्पोज़ितो परिवार शुक्रवार को फ़ास्ट ट्रेन से नेपल्स से आया था। वो अपने सबसे अच्छे कपड़े, अपनी सबसे ऊँची आवाज़ें, और काग़ज़ में लिपटी स्फ़ोल्यातेल्ला की तीन ट्रे “किसी काम आ जाएँ” के लिए लाए थे। किसी ने नहीं पूछा था कि किस काम। ट्रे फ़्रंट डेस्क पर रखी थीं, और दोनों परिवारों के रिश्तेदार बहस करते-करते उनमें से खा रहे थे, जो अपने आप में एक तरह की सुलह थी।
लॉबी के बीचोबीच नोन्नो जीनो मात्तेओ की माँ के सामने खड़े थे।
असुन्ता एस्पोज़ितो अट्ठावन साल की थीं, छोटे क़द की, गहरे हरे कपड़ों में। वो अपना हैंडबैग दोनों हाथों से सामने पकड़े थीं, जैसे कोई ढाल पकड़ता है।
“मैं बस इतना पूछ रही हूँ,” असुन्ता बोलीं, “कि क्या एक डिश हो सकती है। एक। बिना मीट की।”
“बहनजी,” जीनो बोले, बड़ी तहज़ीब से। “ये बोलोन्या की शादी है।”
“मुझे पता है कहाँ है।”
“मेन्यू मेन्यू नहीं है। मेन्यू क़ानून है। शोरबे में तोर्तेल्लीनी। फिर रागू वाली ताल्याटेल्ले। फिर रोस्ट। फिर चीज़। मेरी माँ यही मेन्यू परोसती थीं। उनकी माँ यही मेन्यू परोसती थीं।”
“और जो मीट नहीं खाता, उसके लिए?”
“ब्रेड है।”
“मेरी बहन के लिए है,” असुन्ता बोलीं। “उसका पेट नाज़ुक है।”
उनके पीछे असुन्ता की बहन, जो अपनी तीसरी स्फ़ोल्यातेल्ला खा रही थीं, हैरानी से ऊपर देखने लगीं, फिर धीरे से सिर हिलाया, और अपने पेट पर हाथ रख लिया।
जूलिया आख़िरी तीन सीढ़ियाँ उतरी। किसी का ध्यान नहीं गया, क्योंकि उसी पल असुन्ता ने ठोड़ी उठाई और वो दूसरी बात कह दी।
“वैसे भी,” असुन्ता बोलीं, “नेपल्स में भी हमारे पास रागू है।”
लॉबी चुप नहीं हुई। वो और शांत हो गई, जो उस लॉबी में अपने आप में एक आवाज़ थी।
“हाँ,” जीनो बोले। “सुना है उसके बारे में।”
“हम उसे पूरा इतवार पकाते हैं। सुबह से। मीट के बड़े-बड़े टुकड़े। बीफ़, पोर्क, चिलगोज़े भरे रोल। पूरे टुकड़े, दिखता है कि क्या है। छह घंटे, सात घंटे, जब तक टमाटर गहरा न हो जाए।” असुन्ता ने कंधे उचकाए। “आप लोग यहाँ जो बनाते हैं, ऐसे बारीक कटे मीट से, दूध डालकर, बहुत अच्छा होता है। नेपल्स में हम उसे सॉस कहते हैं।”
जीनो की कलाई पर छोटी-सी स्लेटी मशीन बीप करने लगी।
“सॉस,” जीनो बोले।
“बहुत अच्छी सॉस।”
“बहनजी, हमारे रागू की रेसिपी लिखित में है, दस्तख़तों के साथ, इस शहर के चैंबर ऑफ़ कॉमर्स में…”
“और हमारी रेसिपी हमारी दादियों के दिलों में लिखी है।”
“नोन्नो,” जूलिया बोली।
सब मुड़े।
वो ड्रेसिंग गाउन में थी, बालों में क्लिप लगे, हाथ पर एक लिस्ट लिखी हुई, और वो बिल्कुल अपनी दादी जैसी लग रही थी, कज़िन्स ने बाद में कहा, 1966 की पुरानी तस्वीरों वाली।
“मात्तेओ अपने कमरे में नहीं है,” उसने कहा।
असुन्ता का हैंडबैग एक सेंटीमीटर नीचे आया।
“टहलने गया है,” असुन्ता बोलीं। “वो ऐसा करता है। टहलता है। कहीं होगा, तमीज़ से पेश आ रहा होगा।”
“उसका फ़ोन बिस्तर पर है।”
“तो बिना फ़ोन के टहल रहा है। सेहत के लिए अच्छा है।”
“वाइन नहीं है,” जूलिया कहती गई, “क्योंकि तहख़ाने की चाबी ग़ायब है। ब्रूनो कहते हैं मालिक सार्डीनिया में हैं। बाल दस बजे हैं। अभी आठ बजकर तिरेपन मिनट हुए हैं।” उसने अपना हाथ देखा। “मुझे चाहिए कि सब लोग तीस मिनट के लिए रागू के बारे में बात करना बंद कर दें।”
तैंतीस लोगों ने उसे ऐसे देखा जैसे उसने उन्हें साँस लेना बंद करने को कहा हो।
“बीस मिनट,” जूलिया बोली।
तोहफ़े को देखने जीनो गए। जूलिया उनके पीछे गई क्योंकि किसी को तो जाना था, और क्योंकि उसके तजुर्बे में दादाजी किसी चीज़ को देखने जाते थे तो वो चीज़ टूट जाती थी।
रात वाले कंसीयर्ज, डॉ. लेंत्सी, अब जाग चुके थे, और पीले पड़े थे, और बार-बार माफ़ी माँग रहे थे। उन्होंने पीछे वाला ऑफ़िस खोला। अंदर ग्यारह छतरियाँ थीं, एक बच्चे का जूता, और रेशम का एक सफ़ेद डिब्बा, रिबन के साथ, ऊपर दरार, और चाँदी के अक्षर जिन पर लिखा था जूलिया & मात्तेओ।
शेल्फ़ पर एक ख़ाली जगह थी, पानेत्तोने जितनी।
जीनो बहुत देर तक उस जगह को देखते रहे।
“यहीं था,” डॉ. लेंत्सी बोले। “आइटम एक हज़ार एक सौ तेरह। आधी रात को मैंने ख़ुद दर्ज किया था। किताब में मेरा नोट है। मैं…” उन्होंने हरी किताब खोली और फिर बंद कर दी। “मेरी आँख लग गई। डेस्क पर। मुझे बहुत अफ़सोस है।”
“किसी ने उसे ले लिया,” जीनो बोले।
जूलिया ने रेशम वाला डिब्बा उठाया। वो हल्का था। उसने उसे हिलाया और अंदर काग़ज़ हिलने की आवाज़ सुनी, बहुत सारा काग़ज़। डिनर वाले लिफ़ाफ़े। उसने दरार को देखा, रिबन को, चाँदी के अक्षरों को। किसी ने उसे छुआ तक नहीं था।
“नोन्नो,” उसने कहा, “कोई इस कमरे में आया, लिफ़ाफ़ों वाला पैसा मेज़ पर रखा था, और उसकी जगह वो शेल्फ़ से एक अजीब चीज़ उठा ले गया।”
“मेरा तोहफ़ा।”
“हमें नहीं पता कि वो तोहफ़ा था।”
“तोहफ़ा था। ख़ूबसूरत तोहफ़ा था। गर्म था।”
“आँकड़ों के हिसाब से,” जूलिया बोली, “ये अजीब है।”
जीनो सुन नहीं रहे थे। उन्होंने जैकेट से अपना फ़ोन निकाल लिया था। उन्होंने उसे बाँह भर दूर पकड़ा था, क्योंकि उनका चश्मा ऊपर था, और हर नंबर एक उँगली से दबा रहे थे, ज़ोर से, जैसे फ़ोन ने उनके साथ कुछ निजी तौर पर बुरा किया हो।
“किसे फ़ोन कर रहे हो?”
“काराबिनिएरी को।”
“नोन्नो। शादी चार बजे है।”
उन्होंने हाथ उठाया। किसी ने फ़ोन उठा लिया था।
“गुड मॉर्निंग। मेरा नाम जीनो रॉसी है। मैं होटल बेला विस्ता में हूँ, वाया डेल’इंडिपेंडेंत्सा पर। मुझे एक अपराध की रिपोर्ट करनी है।” उन्होंने सुना। “दो अपराध। किसी ने मेरा तोहफ़ा चुरा लिया है और मेरा होने वाला नाती-दामाद।” उन्होंने फिर सुना, और उनका चेहरा और काला पड़ता गया। “इसी क्रम में।”