Chapter 4

हर कोई शक के घेरे में

जो अपराध कभी हुआ ही नहीं, उसे सुलझाया नहीं जा सकता। कबीर फिर भी कोशिश करने वाला था, और, सबकी हैरानी के लिए, ख़ुद उसकी भी, वो इसमें अच्छा निकलने वाला था।

“यही तो,” कबीर बोला, “हमें पता लगाना है।” वो खड़ा हो गया।

“बैठ जाओ,” मिस ढिल्लों बोलीं, आदतन।

वो बैठ गया। “जाँच बैठे-बैठे भी हो सकती है।”

पीछे टायलर ने काली किताब पहले ही खोल ली थी। “अगर अपराध है, तो उसे दर्ज करना पड़ेगा। मैं मॉनिटर हूँ। मैं अपराध दर्ज करता हूँ।”

“तुम तो बोलने वालों को दर्ज करते हो,” मैडिसन बोली।

“बोलना अपराध है,” टायलर बोला।

“तो ये दर्ज करो,” कबीर बोला। “एक वर्कबुक। नीली। रात में ली गई। आरव पीड़ित है। बाक़ी सब संदिग्ध हैं।”

“सब?” कोल बोला।

“हर वो जो साबित नहीं कर सकता कि वो कहाँ था,” कबीर बोला, “रसोई की मेज़ से अब तक।”

कमरा उस ख़ास ख़ुशी से चुप हो गया जो बच्चों को तब होती है जब उन्हें पता चलता है कि अचानक वो सब संदिग्ध हैं।

कबीर कमरे के आगे गया, जहाँ अपराध नहीं हुआ था, और फिर भी उसे दोबारा गढ़ने लगा।

“चोर रात में आया,” उसने कहा। “एक दरवाज़े से, क्योंकि लोग ऐसे ही अंदर आते हैं। उसे पता था कि आरव का बैग कौन-सा है, क्योंकि आरव का बैग सबसे साफ़ वाला है, और चोर को साफ़ बैग चाहिए होता है। उसने नीली किताब ली और लाल वाली छोड़ दी, क्योंकि उसे सिर्फ़ होमवर्क चाहिए था।”

“इससे हमें क्या पता चलता है,” मिस ढिल्लों बोलीं, जिन्होंने इसे दो वाक्य पहले रोकने का इरादा किया था और किसी तरह नहीं रोका था।

“कि लाल वाली वो पहले ही कर चुका था। तो वो कोई ऐसा है जो हमसे आगे है। कोई होशियार।”

पूरी क्लास एक शरीर की तरह मुड़ी और आरव को देखने लगी, जो उनमें सबसे होशियार था, और जिसने, तकनीकी तौर पर, दोनों कर रखी थीं।

“आरव नहीं,” कबीर बोला। “आरव पीड़ित है। पीड़ित चोर नहीं हो सकता। ये नियम है।”

“ये नियम है क्या,” कोल बोला।

“ये मेरा नियम है, और जाँच मैं कर रहा हूँ, तो यही नियम है।”

झूठ अब अपनी टाँगों पर खड़ा हो चुका था, कमरे में घूम-घूमकर हाथ मिला रहा था। आरव उसे जाते देखता रहा। बहुत अच्छा झूठ था। ये अब होमवर्क भूलने वाले लड़के के बारे में नहीं रहा था बल्कि रात में आने वाले एक चालाक चोर के बारे में हो गया था, और एक गर्म पल के लिए आरव को लगा कि शायद ये उसके पास ही रह जाए।

टायलर ने जाँच वैसे ही पकड़ी जैसे वो हर चीज़ पकड़ता था, यानी बिना रहम के। उसने आगे वाली लाइन से पूछताछ की। उसने डॉसन से पूछा कि सोने के वक़्त वो कहाँ था, और डॉसन ने कहा “सो रहा था”, और टायलर ने सो रहा था ऐसे लिखा जैसे ये इक़बालिया बयान हो।

“डॉसन आरव के पास बैठता है,” टायलर ने ऐलान किया। “डॉसन के पास मक़सद है।”

“मेरा मक़सद क्या है,” डॉसन बोला।

“तुम्हें होमवर्क चाहिए होता। तुम अपना कभी नहीं करते।”

डॉसन ने समझने की कोशिश की कि ये बेइज़्ज़ती है या बचाव, तय नहीं कर पाया, और उसकी ठोड़ी काँपने लगी, जैसे सात साल की उम्र में ठोड़ी काँपती है जब पूरा कमरा तुम्हारी तरफ़ मुड़कर देखे।

आरव ने डॉसन की ठोड़ी देखी। आरव, जिसने ये सब एक किताब मेज़ पर छोड़कर शुरू किया था, एक ऐसे लड़के को देख रहा था जिसे वो ठीक से जानता भी नहीं था, जो चुपचाप वो इंसान बनने लगा था जिसके साथ चीज़ें होती हैं।

“रुको,” आरव बोला।

“हम पास पहुँच गए हैं,” टायलर बोला।

“रुको। किसी ने नहीं लिया।” आरव खड़ा हो गया, जो आरव के लिए लगभग ख़ुद को आग लगाने जैसा था। “मैं उसे घर छोड़ आया। मेज़ पर। भूल गया। मेरी ग़लती है। डॉसन का नाम मत लिखो।”

कमरे ने उसे देखा। होमवर्क भूलने का वो बड़ा, सुरक्षित, मामूली अपराध फ़र्श के बीचोबीच पड़ा था जहाँ सब उसे देख सकते थे, और कुछ नहीं हुआ। न सायरन। न कोई फ़र्श फटा। आरव उसके बीच खड़ा रहा और मरा नहीं।

“शुक्रिया, आरव,” मिस ढिल्लों बोलीं। “कल ले आना।” और वो अगली लाइन की तरफ़ बढ़ गईं, जैसे किसी लड़के का वर्कबुक भूल जाना आम बात हो, जो वो थी, और पूरी बात यही थी।

आरव धीरे-धीरे बैठा, जैसे कोई ऐसी कुर्सी को परख रहा हो जिसे अब भी खड़ा देखकर वो हैरान हो।

“देखा,” कबीर फुसफुसाया। “अब तुम ऐसे लड़के हो जिसके साथ चीज़ें होती हैं। हुई। तुम ज़िंदा हो।”

“तुमने तो ये नहीं कहा था कि ऐसा होगा।”

“मैं जो कहता हूँ कि होगा, वो कभी नहीं होता,” कबीर ने आराम से माना। “पर सब ठीक हो जाता है।”

पीछे टायलर ने काली किताब बंद की। उसने अपना पहला केस सुलझा लिया था, और पता चला था कि कोई केस था ही नहीं, और उसे नहीं पता था कि इसे कैसे दर्ज करे। आख़िर में उसने सँभालकर लिखा: कोई अपराध नहीं। फिर भी नज़र है।

खिड़की के बाहर क़स्बा कनाडा का सबसे बदनाम शहर बना रहा, जहाँ पूरी सुबह की सबसे बुरी बात थी रसोई की मेज़ पर छूटी एक नीली किताब, और दूसरी सबसे बुरी बात ये थी कि कुछ मिनटों के लिए वो लगभग किसी और की ग़लती बन गई थी।

उस शाम फ़ोन बजा, क्योंकि मूस जॉ में फ़ोन आख़िरकार हमेशा बजता था।

“मैंने सुना है,” प्रमिला आंटी बोलीं, इसके मज़े से गर्मजोशी भरी, “कि चोरी हुई है। स्कूल में। कबीर के स्कूल में। रात में किसी ने सेंध लगाई।”

सुमन ने चम्मच नीचे रख दिया। एक सेकंड में उसे पूरी तस्वीर दिख गई: ये क़स्बा, गोफ़र रिज के दो भूरे परिवारों में से एक, नया वाला, और अब एक स्कूल जिसमें चोर है और उसका बेटा कहानी के कहीं बीच में। “कोई चोरी नहीं हुई,” उसने कहा।

“मैंने तो ऐसा नहीं सुना।”

“कबीर।” उसने फ़ोन ढका। “तुम्हारे स्कूल में चोरी हुई थी?”

“नहीं,” कबीर फ़र्श से बोला, जहाँ वो बिना किसी ख़ास वजह के लेटा था।

“तो प्रमिला आंटी को क्यों लग रहा है कि हुई?”

“क्योंकि मैंने कहा था कि हुई।” उसने सोचा कि समझाए या नहीं, और दरियादिली से तय किया कि समझाएगा। “आरव अपना होमवर्क भूल गया था, और उसे डर था कि लोग सोचेंगे वो भूलने वाला लड़का है। तो मैंने कहा किसी ने चुरा लिया। उसकी मदद के लिए। फिर टायलर ने डॉसन पर लगभग इल्ज़ाम लगा दिया, तो आरव ने सच्ची बात कह दी, और सब ज़िंदा बचे।” उसने करवट ली। “कोई चोर था ही नहीं। चोर मैंने बनाया।”

“तो तुमने झूठ बोला,” सुमन बोली।

कबीर पीठ के बल लेटा छत देखता रहा। उसे ये शब्द पसंद नहीं था। उसने इसे कई तरफ़ से पलटकर देखा, वैसे ही जैसे वो कोट पहनकर देखता था।

“हाँ,” आख़िर उसने कहा। “एक। मुझे अच्छा नहीं लगा। वो घूमता ही रहता था।”

सुमन फ़ोन सीने से लगाए खड़ी अपने बेटे को देखती रही, जिसने एक दोस्त की इज़्ज़त बचाने के लिए एक अपराध गढ़ लिया था। सोचो तो, ये उसकी अब तक की सबसे गिल वाली हरकत थी।

“कोई चोरी नहीं,” उसने प्रमिला आंटी से कहा। “ग़लतफ़हमी थी।”

“ग़लतफ़हमी,” प्रमिला आंटी ने निराश होकर कहा, और चार और परिवारों को बताने के लिए फ़ोन रख दिया कि गिल लोग मुकर रहे हैं।

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