सबसे लंबा संदिग्ध
जो मार्कर ग़ायब हुआ वो अच्छा वाला था। काला वाला, जो चीं-चीं नहीं करता था और सूखता नहीं था, वो जिसे प्रिंसिपल हाल्वोर्सन आगे वाले हॉल के बड़े व्हाइटबोर्ड की कगार पर रखते थे और सिर्फ़ ज़रूरी चीज़ों के लिए इस्तेमाल करते थे, जैसे विंटर कॉन्सर्ट में बचे दिनों की गिनती।
मंगलवार को वो कगार पर नहीं था।
मंगलवार दोपहर तक असेंबली बुला ली गई थी।
प्रिंसिपल हाल्वोर्सन पूरे ग्रेड 2 और आधे ग्रेड 3 के सामने खड़े थे, और अगर ग़ौर से देखो, तो वो पूरी तरह किसी मार्कर के बारे में बात नहीं कर रहे थे।
“चीज़ें,” उन्होंने कहा, “यूँ ही ग़ायब नहीं होतीं। अच्छे से चलने वाले स्कूल में नहीं। अच्छे से चलने वाला स्कूल वो जगह है जहाँ चीज़ वहीं रहती है जहाँ तुम उसे रखते हो।” वो एक भारी-भरकम, थके हुए आदमी थे, और इन दिनों बिल्डिंग में बच्चे बहुत ज़्यादा थे और बिल्डिंग बहुत कम, और यार्ड में पोर्टेबल कमरे थे, और बोर्ड की एक चिट्ठी थी जिसका उन्होंने जवाब नहीं दिया था, और मार्कर के नीचे कहीं ये सब था। “किसी ने इसे लिया है। और हम पता लगाएँगे कि किसने।”
कबीर ने हाथ उठाया, क्योंकि वो क्लास का प्रतिनिधि था, और प्रतिनिधि प्रतिनिधित्व करता है।
“क्या हम संदिग्ध हैं?”
“हर कोई संदिग्ध है,” प्रिंसिपल हाल्वोर्सन बोले, “जब तक मार्कर मिल नहीं जाता।”
“तो मैं संदिग्धों का प्रतिनिधि हूँ,” कबीर बोला, और खड़ा हो गया, “और मेरे कुछ सवाल हैं।”
“तुम मुझसे सवाल नहीं कर सकते। जाँच मैं कर रहा हूँ।”
“किसी को तो आपका काम चेक करना चाहिए,” टायलर बोला, बग़ल से, जहाँ उसने ख़ुद को अदालत का रिपोर्टर नियुक्त कर लिया था और काली किताब एक साफ़ पन्ने पर खोल रखी थी।
“आपने मार्कर आख़िरी बार कब देखा था?” कबीर ने पूछा।
प्रिंसिपल हाल्वोर्सन ने, जिन्होंने बीस साल ये स्कूल चलाया था और जिनसे किसी सात साल के बच्चे ने कभी जिरह नहीं की थी, तय करने से पहले ही जवाब दे दिया। “आज सुबह।”
“कहाँ?”
“कगार पर।”
“कगार पर ताला लगा था?”
“कगारों पर ताले नहीं लगते।”
“तो कोई भी उस तक पहुँच सकता था। आप भी। ख़ास तौर पर आप। यहाँ सबसे लंबे आप हैं।”
पूरी असेंबली एक साथ मुड़ी और प्रिंसिपल पर विचार करने लगी, जो बेशक कमरे के सबसे लंबे संदिग्ध थे।
“आपने उसे कगार से जाते देखा?”
“नहीं।”
“किसी ने उसे कगार से जाते देखा?”
“नहीं,” प्रिंसिपल हाल्वोर्सन बोले। “जाँच का मतलब यही तो है।”
“पर किसी ने उसे जाते नहीं देखा,” कबीर बोला। “आपने नहीं देखा। हमने नहीं देखा। तो हमें असल में पता नहीं कि वो लिया गया। हमें बस इतना पता है कि वो वहाँ नहीं है। ये दो अलग बातें हैं। एक में चोर है। दूसरी में बस एक मार्कर है जो वहाँ नहीं है जहाँ आपने सोचा था।” उसने ये नरमी से कहा, वैसे ही जैसे वो हर वो बात कहता था जो किसी बड़े के पैरों तले से ज़मीन खींच लेती थी। “बदनाम शहर में हर कोई चोर की तरफ़ हाथ बढ़ाता है। पर ज़्यादातर बार दूसरी वाली होती है।”
असेंबली बुदबुदाई। दो सौ बच्चे एक साथ ये खोज रहे थे कि मुक़दमा पलटकर दूसरी तरफ़ मुँह किए खड़ा है।
प्रिंसिपल हाल्वोर्सन ने वही किया जो घिरे हुए जाँचकर्ता करते हैं, यानी किसी छोटे को ढूँढ़ा जिस पर उँगली उठाई जा सके।
“तुम,” उन्होंने ग्रेड 3 के कोडी नाम के एक लड़के से कहा, जो एक बार तीन ऐसे रबड़ों के साथ पकड़ा गया था जो उसके नहीं थे। “तुम्हारा इतिहास है।”
“ऑब्जेक्शन,” कबीर बोला।
“तुम ऑब्जेक्शन नहीं कह सकते। तुम सात साल के हो।”
“मैं प्रतिनिधि हूँ। अब मैं कोडी का प्रतिनिधि हूँ। उसे एक की ज़रूरत लग रही है।” कबीर आरोपी की तरफ़ मुड़ा। “कोडी। मार्कर तुम्हारे पास है?”
“नहीं,” कोडी बोला।
“किसी ने कोडी को उसे लेते देखा?”
“नहीं,” असेंबली बोली।
“तो कोडी के पास बस इतिहास है,” कबीर बोला, “और इतिहास मार्कर नहीं होता। अगर होता, तो हम हर उस इंसान को गिरफ़्तार कर सकते जिसने कभी कुछ किया हो। हम सबको गिरफ़्तार कर सकते। ये बदनाम शहर है। यहाँ हर किसी का इतिहास है।” उसने संतुष्ट होकर चारों तरफ़ देखा। “इसीलिए उसका इस्तेमाल नहीं करते। जो दिखता है उसका इस्तेमाल करते हैं। और कोडी को मार्कर के साथ कोई नहीं देख सकता, क्योंकि कोडी के पास मार्कर नहीं है।”
कोडी, जो असेंबली में ख़ुद को सँभालकर आया था, वैसे जैसे इतिहास वाले सँभलना सीख जाते हैं, थोड़ा भौंचक्का होकर बैठ गया, कि ज़िंदगी में पहली बार किसी ने उसका बचाव किया था।
प्रिंसिपल हाल्वोर्सन ने तलाशी की कोशिश की। उन्होंने आगे वाली लाइन से जेबें जिम के फ़र्श पर ख़ाली करवाईं, और जेबों से निकला: एक पत्थर, एक दूसरा पत्थर, एक कुत्ते का मुड़ा हुआ चित्र, ग्यारह सेंट, और प्लास्टिक का एक छोटा डायनासोर जिसकी एक टाँग ग़ायब थी। कोई मार्कर नहीं।
“ये सबूत है,” टायलर ने डायनासोर के बारे में उम्मीद से कहा।
“किस बात का,” कबीर बोला।
“अभी पता नहीं,” टायलर बोला। “मैं इसे खुला रख रहा हूँ।”
और कबीर ने प्रिंसिपल को देखा, जो एक खोए मार्कर के लिए ऐसे पसीना बहा रहे थे जैसे कोई खोए मार्कर के लिए पसीना नहीं बहाता, और समझ गया कि मार्कर वो चीज़ नहीं थी जो इस आदमी ने असल में खोई थी। तो उसने मार्कर ढूँढ़ना बंद किया, और धीरे से, उसके नीचे वाली चीज़ ढूँढ़नी शुरू की।