एक अच्छी बात
सुरक्षित, प्यारी, बिना बहस वाली एक्टिविटी ये थी: अपने बारे में एक अच्छी बात।
उस पर बहस हो सकती थी। मिस ढिल्लों को धीरे-धीरे समझ आ रहा था कि रूम 6 में, दूसरी लाइन वाले लड़के के रहते, हर चीज़ पर बहस हो सकती थी। पर उन्हें ये अभी पता नहीं था, तो वो मुस्कुराईं, और शुरू किया।
“हम पूरे कमरे में बारी-बारी चलेंगे,” उन्होंने कहा, “और हर कोई अपने बारे में एक बात बताएगा। एक अच्छी बात। पहले मैं बताती हूँ। मेरा नाम मिस ढिल्लों है, और मैं यहीं मूस जॉ में पली-बढ़ी हूँ।”
“मैं भी,” मैडिसन बोली।
“मैं भी,” कोल बोला।
“मैं भी,” लगभग पूरा कमरा बोला, क्योंकि ज़्यादातर के लिए ये सच था।
“मेरे पास एक कुत्ता है,” मैडिसन बोली। “उसका नाम बैंडिट है।”
“मुझे असली हॉकी स्टिक मिली है,” कोल बोला। “लकड़ी की, प्लास्टिक की नहीं।”
“हम झील पर गए थे,” पेटन बोली।
“मैं जब चाहूँ डकार ले सकता हूँ,” डॉसन बोला।
“शुक्रिया, डॉसन,” मिस ढिल्लों बोलीं।
“मेरे पास एक नोटबुक है,” टायलर बोला।
“हमें पता है, टायलर,” पूरा कमरा बोला।
“कबीर?”
कबीर ने इस पर गंभीरता से सोचा, क्योंकि वो हर काम गंभीरता से करता था।
“हम हवाई जहाज़ से आए थे,” उसने कहा। “बहुत लंबा था। मेरे पापा का नाम गुरमेल है, पर स्टोर पर सब उन्हें गैरी बुलाते हैं, तो अब मेरे पापा का नाम गैरी है। हमारा एक घर है, पर उसका ज़्यादातर हिस्सा बैंक का है। मेरी मम्मी मेरे कपड़ों पर बहुत ज़ोर से इस्त्री करती हैं ताकि कोई ये न सोचे कि हम ग़रीब हैं। हम थोड़े ग़रीब हैं। तो ये अच्छा प्लान है, और काम कर रहा है।”
कमरे में चुप्पी छा गई।
“और,” कबीर बोला, “मैं बग़ल वाले घर में रहने वाली लड़की से शादी करूँगा। उसका नाम ब्रुक है। उसे अभी पता नहीं। वो सोलह की है। मैं इंतज़ार कर रहा हूँ।”
“इस्त्री क्या होती है?” कोल बोला।
“जब कपड़े चपटे और गर्म हों,” आरव बोला, जिसे पता था, क्योंकि उसके भी ऐसे ही थे।
“मेरी मम्मी कहती हैं कि अगर तुम सात के हो तो सोलह वाले से शादी नहीं कर सकते,” मैडिसन बोली।
“पता है,” कबीर बोला। “इसीलिए तो इंतज़ार कर रहा हूँ।”
मैडिसन ने इस पर सोचा और उसे इसमें कुछ ग़लत नहीं मिला। “बैंडिट फिर भी मेरा कुत्ता है,” उसने कहा, कहीं ये मुक़ाबला न बन गया हो।
मिस ढिल्लों ने एक पल उसे देखा। वो हवाई जहाज़ को जानती थीं। वो उस घर को जानती थीं जो बैंक का था। वो इस्त्री को जानती थीं, क्योंकि उनकी अपनी माँ भी बिल्कुल ऐसे ही इस्त्री करती थीं, बिल्कुल इसी वजह से, इससे ज़्यादा दूर नहीं एक क़स्बे में।
“शुक्रिया, कबीर,” उन्होंने कहा। “वो एक से ज़्यादा बातें थीं।”
“आपने कहा था एक अच्छी बात,” कबीर बोला। “वो सब अच्छी थीं।”
वो उन्हें कैलेंडर की तरफ़ ले गईं, क्योंकि कैलेंडर कम से कम सीधा-सीधा सच था।
“आज,” उन्होंने कहा, “मंगलवार है।”
“आपको कैसे पता?”
“क्योंकि कल सोमवार था।”
“आपने सोमवार को जाते देखा?”
“कबीर।”
“मैं बस ये जानना चाहता हूँ कि इसका इंचार्ज कौन है,” उसने कहा। “दिन, या कैलेंडर। क्योंकि अगर कैलेंडर है, तो हम ख़ुद को एक शनिवार दे सकते हैं।”
कमरे को ये आइडिया बहुत पसंद आया।
“आज मंगलवार है,” मिस ढिल्लों बोलीं, “क्योंकि आज मंगलवार है।”
“यही आपने लिस्ट के बारे में भी कहा था।”
और उनके पास इसका भी कोई जवाब नहीं था, क्योंकि जवाब वही था, और वो पहली बार भी काम नहीं आया था।
रिसेस में वो दरवाज़े पर लाइन में खड़े हुए, क्योंकि कबीर भी मानता था कि लाइन एक असली चीज़ है जो दिखती है। वो सबसे आगे था, वैसे ही जैसे वो दरवाज़े के लिए सबसे आगे होता था और किसी और चीज़ के लिए नहीं।
“मिस ढिल्लों,” उसने कहा। “आपको एक बात बताऊँ?”
“कैलेंडर के बारे में?”
“नहीं।” उसने उन्हें ऐसे देखा जैसे अपने पापा को देखता था जब उन्हें मदद चाहिए होती थी। “आप नई हैं, और आपने आज सुबह चार बार साँस वाली एक्सरसाइज़ की। मैंने गिना। तो मैं आपको एक बात बताता हूँ जो मेरी मम्मी कहती हैं। वो कहती हैं कि अगर लोग आपके बारे में बात करने ही वाले हैं, तो उन्हें बात करने को कुछ सच ही दे दो।”
“तुम्हारी मम्मी ऐसा कहती हैं।”
“वो आईने से कहती हैं। हर सुबह।” उसने सोचा। “मुझे नहीं लगता उनके लिए काम कर रहा है। पर शायद आपके लिए कर जाए।”
“शुक्रिया, कबीर,” उन्होंने कहा, क्योंकि उन्हें समझ नहीं आया कि और क्या कहें।
“कोई बात नहीं,” कबीर बोला, जो हमेशा यही कहता था।
फिर बच्चे यार्ड में बिखर गए, और कबीर उनके साथ। मिसेज़ सांतोस ने दरवाज़े से सिर अंदर किया।
“तुम अब भी यहीं हो।”
“उसने मुझे सलाह दी,” मिस ढिल्लों बोलीं। “अपनी मम्मी की सलाह।”
“वो हमेशा आगे बढ़ा देते हैं।”
“हाज़िरी वाली बहस वो जीत गया। फिर उसने क्लास को बताया कि उसका घर बैंक का है, और वो एक सोलह साल की लड़की से शादी करने वाला है।”
“यानी जम रहा है।”
“वो एक साल मेरे पास है।”
“वो एक साल तुम्हारे पास है, और तुम एक साल उसके पास।” मिसेज़ सांतोस ने क्लिपबोर्ड की तरफ़ सिर हिलाया। “हाज़िर लगाया?”
“लगाया।”
“तो लिस्ट ख़ुश है। किसी को तो होना चाहिए।” और वो अपने अगले परिवार को ढूँढ़ने चली गईं।
मिस ढिल्लों ने उसके नाम के पास वाले टेढ़े टिक को देखा। उन्हें लिस्ट से पहले पता था कि वो यहाँ है। उसे भी।
उन्होंने कल के लिए एक साफ़ पन्ना पलटा और उसे हाथ से सपाट किया, वैसे ही जैसे उनकी माँ उस क़मीज़ को सपाट करती थीं जो पहले से सपाट होती थी।