एपिसोड 32: गुरुवार की किट्टी
बहादुरगढ़, हरियाणा · 2026
सुषमा गुरुवार की किट्टी से सवा पाँच बजे लौटी और किसी की शादी की बात ही नहीं की।
रशिका की नज़र गई।
वो किचन काउंटर पर प्याज़ काट रही थी जब सुषमा ने हैंडबैग हुक पर टाँगा, चप्पलें उतारीं, और नल से एक गिलास पानी भरा। पूरा पी गई। गिलास रखा। फिर भरा।
“क्या हुआ?” रशिका ने कहा।
“कुछ नहीं हुआ।”
“तीन घंटे गई रही और एक लड़के के बारे में नहीं बताया?”
सुषमा ने तौलिए से हाथ पोंछे, धीरे-धीरे, जैसे वो करती थी जब सोच रही होती थी कि क्या बोलना है। मेज़ से कुर्सी खींची और बैठ गई।
“मीना ने तेरे बारे में पूछा।”
“मीना तो हमेशा पूछती है।”
“ऐसे नहीं।” सुषमा ने हाथ मेज़ पर सपाट रखे। “उसने तेरे अख़बार के बारे में पूछा। मोदी टाइल्स वाले मामले के बारे में। बोली, ‘तुम्हारी लड़कियाँ बड़ी बहादुर हैं, सुषमा।’ सबके सामने। बहादुर। जैसे दाल की तारीफ़ कर रही हो।”
“वो बस मीना है।”
“वो बस मीना नहीं है। प्रेमलता ने उठा लिया। सरोज ने उठा लिया। चाय आते-आते पूरा कमरा ‘वर्मा घर की लड़कियाँ और मोदी वाला मामला’ पर बात कर रहा था। सवाल नहीं। बस बात। जैसे ये भी एक टॉपिक हो। जैसे पानी का प्रेशर या सड़क का काम।”
रशिका ने चाकू रख दिया।
“उन्हें कुछ नहीं पता,” उसने कहा।
“उन्हें कुछ पता होने की ज़रूरत नहीं। उन्हें बात करनी है। बस यही दिक़्क़त है।” सुषमा की आवाज़ नीची थी। वो वाली सुषमा नहीं — वो आवाज़ नहीं जो आँगन भर दे Bolero या बिजली के बिल पर। ये दूसरी आवाज़ थी, नीचे वाली। “मैं चालीस मिनट बैठी रही जब ये औरतें — औरतें जिनके साथ मैं नौ साल से हर गुरुवार बैठती हूँ — मुझे ऐसे देख रही थीं जैसे मैं उनके घर में कोई ऐसी चीज़ ला रही हूँ जो वो अपने पास नहीं चाहतीं।”
“किसी ने ऐसा नहीं कहा।”
“किसी को कहने की ज़रूरत नहीं। तुझे लगता है मुझे नहीं पता कि कमरा कैसा लगता है जब वो तय कर रहा हो कि तेरे बारे में क्या सोचना है?” सुषमा ने तौलिया गोद में खींचा और मोड़ा, फिर एक बार और मोड़ा। “ये छोटा शहर है, रशिका। तेरी उम्र तेईस है और अभी तक रिश्ता नहीं आया। गोपिना बीस साल की है और वो एक मरे हुए लड़के के बारे में सवाल पूछने उस फ़ैक्ट्री के गेट पर जा रही है जहाँ आधा ज़िला काम करता है। तू जानती है ये कैसा दिखता है? क्या है वो नहीं। कैसा दिखता है।”
रशिका जानती थी।
“वो कहाँ है?” सुषमा ने पूछा।
“बाहर। स्टेशनरी की दुकान पर। मैंने कॉपियाँ लाने भेजा है।”
“अच्छा किया।” सुषमा ने कुर्सी पीछे धकेली। “वहीं रख उसे।”