नैपकिन नंबर ग्यारह
शनिवार, सुबह 9:05। वाइन का तहख़ाना, होटल बेला विस्ता।
मात्तेओ एस्पोज़ितो सांजोवेज़े वाइन के एक लकड़ी के क्रेट पर बैठा था, होटल के ड्रेसिंग गाउन और एक मोज़े में, और एक नैपकिन पर लिख रहा था।
जूलिया, मैं तुमसे प्यार करता हूँ, और इससे पहले कि हम
वो रुक गया। उसने इससे पहले कि हम काट दिया। उसने बचा हुआ देखा। जूलिया, मैं तुमसे प्यार करता हूँ। ये सच था, पर दिक़्क़त ये नहीं थी। उसने नैपकिन बाक़ियों के साथ ढेर पर रख दिया। अब दस हो गए।
तहख़ाना लंबा और नीचा और ठंडा था, ईंट की गोल छत के साथ, किसी डबलरोटी के अंदर जैसा। दोनों तरफ़ बोतलों के रैक अँधेरे में दूर तक चले गए थे। बीच में एक तार से एक अकेला बल्ब लटक रहा था। ये तीन दिनों में सबसे शांत कमरा था जिसमें मात्तेओ रहा था।
ड्रेसिंग गाउन की जेब में लोहे की एक बड़ी चाबी थी।
उसने उसे पौने आठ बजे रसोई की सीढ़ियों के पास वाली खूँटी से उठाया था, जब ब्रूनो ऊपर नाश्ते को लेकर चिल्ला रहा था, ये सोचकर कि पाँच मिनट के लिए नीचे आएगा और सोचेगा। उसने अपने पीछे दरवाज़े पर ताला लगा दिया था क्योंकि बंद दरवाज़े के पीछे सोचना आसान होता है। फिर उसने शेफ़ ब्रूनो को आते सुना, चाबी ढूँढ़ते सुना, और कई ऐसे शब्द कहते सुना जिनकी मात्तेओ की माँ घर में इजाज़त नहीं देती थीं। और पाँच मिनट डेढ़ घंटा बन गए थे, और अब चाबी हाथ में लेकर बाहर निकलने में बहुत देर हो चुकी थी। तुम अपनी शादी के दिन तहख़ाने से वो चाबी हाथ में लेकर बाहर नहीं आ सकते जिसे सब ढूँढ़ रहे हों, और ये नहीं कह सकते, सॉरी, मैं सोच रहा था।
तो वो वहीं रहा।
उसने जेब से दूसरी चीज़ निकाली। ये शादी का मेन्यू था, क्रीम रंग के मोटे कार्ड पर छपा, चाँदी के बॉर्डर के साथ और ऊपर दोनों परिवारों के नाम।
कैपन के शोरबे में तोर्तेल्लीनी।
बोलोन्या स्टाइल रागू के साथ ताल्याटेल्ले।
मिक्स रोस्ट: पोर्क, वील और कैपन।
पार्मिजानो-रेजानो, 36 महीने पुराना।
चार सौ तोर्तेल्लीनी। जूलिया की दादी की बहनों ने गुरुवार को उन्हें हाथ से बनाया था, ज़िया कार्ला की रसोई में एक मेज़ के चारों तरफ़ बैठकर, हर एक को उँगली के चारों तरफ़ मोड़ते हुए। मात्तेओ देखता रहा था। उसे भी मोड़ने के लिए एक दिया गया था। उसने उसे बुरी तरह मोड़ा था, और सब हँसे थे, और ज़िया कार्ला ने उसका सिर चूमकर कहा था कि उसके हाथ सर्जन के हैं और दिल नेपल्स वाले का, और उसे नहीं पता चला था कि ये तारीफ़ थी या नहीं।
हर एक के अंदर पोर्क लॉइन था, प्रोशुतो, और मोर्ताडेला।
मात्तेओ ने पंद्रह साल की उम्र से मीट नहीं खाया था। उसने स्कूल में नहीं खाया था, यूनिवर्सिटी में नहीं, नेपल्स में नहीं, बोलोन्या में नहीं, तीन साल में रॉसी परिवार के जिन इतवार के लंचों में वो गया था उनमें से एक में भी नहीं। उसमें इसका हुनर था। वो प्लेट में मीट को ऐसे इधर-उधर कर सकता था कि वो खाया हुआ लगे। वो रोस्ट को छोटे और छोटे टुकड़ों में काट सकता था जब तक वो ऐसा न लगे जिसका किसी ने मज़ा लिया हो। वो ठीक उसी पल मेज़ से उठ सकता था जब थाली दोबारा घूमने वाली हो। जूलिया सोचती थी वो धीरे खाता है। नोन्नो जीनो सोचते थे उसका पेट नाज़ुक है, सारे दक्षिण वालों की तरह।
बस उसकी माँ को पता था। उन्हें तब से पता था जब वो पंद्रह का था, और उन्होंने मदद की थी। उसकी तरफ़ से उन्होंने उसकी दादी से लड़ाई की थी। उन्होंने बुआओं-मौसियों की तीन पीढ़ियों से झूठ बोला था। कल रात उन्होंने सबके सामने वेटर से पूछा था कि बिना मीट का कुछ है क्या, और नोन्नो जीनो ने उन्हें ऐसे देखा था जैसे कोई आदमी आग को देखता है।
मात्तेओ ने एक नया नैपकिन लिया।
जूलिया, एक बात है जो मैंने तुम्हारे परिवार को कभी नहीं बताई, और
और क्या? और वो ये है। और मैं वो नहीं खाता जो तुम्हारी दादी की दादी ने बनाया था। और वो चार सौ छोटी-छोटी चीज़ें जो तुम्हारी बुआओं ने गुरुवार को अपने हाथों से बनाईं, उन्हें मैं मुँह में नहीं डाल सकता, और नहीं डालूँगा, और ये कह भी नहीं सकता, क्योंकि मैंने उन्हें बनाते देखा था, और वो गा रही थीं।
उसने उसे काट दिया। ग्यारह।
तहख़ाने की सीढ़ियों के ऊपर वाले दरवाज़े से आवाज़ें आईं।
वो सबको जानता था। शेफ़ ब्रूनो, भारी और चिढ़ा हुआ। ज़िया कार्ला, ऊँची और हर बात पर पक्की। कज़िन फ़ाबियो, जो हर चीज़ की वीडियो बनाता था, अपने फ़ोन को कमेंट्री सुनाता हुआ। उसकी अपनी माँ, तीखी। और सबके ऊपर, जैसे बैंड के ऊपर तुरही, नोन्नो जीनो।
“…चार हज़ार बोतलों वाला होटल और वाइन नहीं! मज़ाक़ है! अख़बार वाला मज़ाक़ है!”
“मालिक सार्डीनिया में हैं,” ब्रूनो बोला।
“तो सार्डीनिया वाइन ले आए!”
मात्तेओ ने जेब में हाथ डाला और चाबी पकड़ी। वो ठंडी और भारी थी। वो अभी सीढ़ियाँ चढ़कर दरवाज़ा खोल सकता था और उसे ब्रूनो को दे सकता था। वाइन हो जाती। सब वाइन को लेकर कोई चार सेकंड ख़ुश होते, और फिर ड्रेसिंग गाउन को देखते, और एक मोज़े को, और नैपकिनों को, और उससे पूछते क्यों।
वो सीढ़ियाँ नहीं चढ़ा।
तहख़ाने के दूर वाले सिरे पर, आख़िरी रैक के पार, एक दूसरा दरवाज़ा था। लोहे का, बहुत पहले काले रंग से पुता हुआ, ऐसे ताले के साथ जो इतना ज़ंग खा चुका था कि कुंडे के साथ एक ही टुकड़ा बन गया था। किसी ने उसके बग़ल की दीवार पर सफ़ेद पेंट से एक तारीख़ लिखी थी, बहुत पुरानी, अंक बहते हुए: 1944। उसके नीचे से ठंडी हवा आती थी। और एक आवाज़ भी, धीमी और लगातार। पानी, शहर के नीचे कहीं चलता हुआ।
मात्तेओ ने उस डेढ़ घंटे का कुछ हिस्सा उस दरवाज़े को देखते हुए बिताया था। उसने सोचा था कि कैसा होगा उसे खोलना, और अँधेरे में चल देना, और कहीं और निकलना, किसी दूसरे शहर में, एक ऐसे आदमी की तरह जिसने कभी किसी से कोई वादा नहीं किया।
फिर उसने जूलिया के चेहरे के बारे में सोचा था, और क्रेट पर लौट आया था।
उसने एक नया नैपकिन लिया और अभी उस पर कुछ नहीं लिखा।
ऊपर आवाज़ें चलती रहीं। असुन्ता कह रही थीं कि उनका बेटा टहलने गया है। ज़िया कार्ला कह रही थीं कि बिना फ़ोन के कोई नहीं टहलता, नेपल्स में भी नहीं। फ़ाबियो अपने फ़ोन से कह रहा था, “दूल्हा ग़ायब है, शादी का दिन है, आप लाइव देख रहे हैं।”
फिर सीढ़ियों के ऊपर वाला दरवाज़ा खड़खड़ाया। किसी ने उस पर हाथ रखकर धक्का दिया था। मात्तेओ ने साँस रोक ली। दरवाज़ा नहीं खुला। अच्छा दरवाज़ा था।
“ताला लगा है,” दूसरी तरफ़ से एक आवाज़ आई, बहुत पास। नोन्नो जीनो। वो ठीक वहीं खड़े थे, एक दरवाज़े और चौदह सीढ़ियों की दूरी पर। मात्तेओ को उनकी साँस सुनाई दे रही थी, और उसे, बहुत धीमे, उनकी कलाई पर उस छोटी स्लेटी मशीन की बीप सुनाई दे रही थी।
“किसी ने मेरा तोहफ़ा चुरा लिया,” जीनो बोले, दरवाज़े से, तहख़ाने से, सबसे। “किसी ने चाबी चुरा ली। और कोई उस लड़के को मेरी पोती की ज़िंदगी के सबसे ज़रूरी दिन उठा ले गया।”
“नोन्नो,” जूलिया की आवाज़ आई, दूर से। “काराबिनिएरी रास्ते में हैं।”
“अच्छा है।” बीप तेज़ हो गई। “क्योंकि जब मुझे इसका ज़िम्मेदार आदमी मिलेगा, मैं तुमसे क़सम खाता हूँ, तुम्हारी दादी की क़ब्र की क़सम, मैं उसे उस मेज़ पर बिठाऊँगा, और इस मेन्यू में जो कुछ है वो सब उसे खिलाऊँगा।”
क़दमों की आवाज़ दूर चली गई।
मात्तेओ ठंडे अँधेरे में सांजोवेज़े के क्रेट पर बैठा रहा, एक जेब में चाबी और दूसरी में मेन्यू।
उसने एक नया नैपकिन लिया। बारह।