जंग की बैठक
शनिवार, दोपहर 1:05। होटल बेला विस्ता।
एक बजे नोन्नो जीनो ने शादी चार से छह बजे कर दी, और एक बजकर पाँच मिनट पर जंग की बैठक बुला ली।
उन्होंने बैठक लॉबी के पूरब वाले सिरे पर रखी, गमले वाले ताड़ के पास, क्योंकि जब वो सालगिरह पर इस होटल में आते थे तो उनकी स्वर्गीय पत्नी हमेशा वहीं बैठती थीं, और क्योंकि वहाँ से उन्हें सामने का दरवाज़ा, सीढ़ियाँ, और एस्पोज़ितो परिवार दिखता था।
एस्पोज़ितो परिवार ने लॉबी के पश्चिम वाले सिरे पर, लिफ़्टों के पास, अपनी अलग बैठक बुलाई थी। वो ठीक उसी पल शुरू हुई थी जिस पल उनकी। जीनो इसे इत्तफ़ाक़ नहीं मानते थे।
“रिपोर्ट,” जीनो बोले।
परिवार ने रिपोर्ट दी।
कज़िन फ़ाबियो ने बताया कि उसने आज सुबह पूरी लॉबी की वीडियो बनाई थी, उस पल समेत जब ज़िया कार्ला ज़मीन से ऊपर उठी थीं, और वीडियो पर अब चार हज़ार व्यूज़ हैं, और कोई यक़ीन नहीं कर रहा कि वो असली है।
ज़िया कार्ला ने बताया कि वो ज़मीन से ऊपर नहीं उठी थीं, कि वो लैम्ब्रुस्को की ख़राब बोतल थी, और कि अगर फ़ाबियो ने वीडियो किसी और को दिखाया तो वो उसे अपनी वसीयत से निकाल देंगी, जिसमें वो फ़िलहाल था ही नहीं।
टोनीनो चाचा ने बताया कि उन्होंने शहर की हर वाइन की दुकान पर फ़ोन किया और सब दोपहर के लिए बंद हो रही हैं।
शेफ़ ब्रूनो ने एक संदेसिये के ज़रिये बताया कि अब उसके पास चार सौ तोर्तेल्लीनी हैं, कैपन का ग्यारह लीटर शोरबा, एक बहुत बड़ा रागू, और पीने को कुछ नहीं, और अगर यही चलता रहा तो वो अपनी हरकतों का ज़िम्मेदार नहीं होगा।
और जूलिया की माँ ने बताया कि जूलिया शहर में है, बाल बनवाकर और ड्रेस एक बैग में लिए, यहाँ से नदी तक हर चर्च, बार और किताबों की दुकान में मात्तेओ को ढूँढ़ रही है, और उसके बिना नहीं लौटेगी।
जीनो ने सब कुछ अपनी छड़ी के मूठ पर हाथ बाँधे सुना। उनकी कलाई की मशीन ने दो बार बीप किया, फिर शांत हो गई।
“और तोहफ़ा?” उन्होंने कहा।
तोहफ़े के बारे में किसी के पास कोई रिपोर्ट नहीं थी।
लॉबी के पश्चिम वाले सिरे पर असुन्ता एस्पोज़ितो उठ खड़ी हुईं। वो संगमरमर पार करके उनकी तरफ़ आईं, अकेली, हैंडबैग सामने पकड़े। रॉसी परिवार चुप हो गया। एस्पोज़ितो परिवार चुप हो गया। लिफ़्ट भी, आते हुए, जैसे चुप हो गई।
“मिस्टर रॉसी,” असुन्ता बोलीं।
“बहनजी।”
“मेरा बेटा ग़ायब है।”
“पता है। मैं नौ बजे से यही कह रहा हूँ।”
“आप कह रहे हैं कि किसी ने उसे चुरा लिया। किसी ने नहीं चुराया। कोई उसे चुरा ही नहीं सकता। वो इकतीस साल का है और बहुत समझदार लड़का है।” उन्होंने हैंडबैग और कसकर पकड़ा। “पर वो जवाब नहीं दे रहा, क्योंकि उसका फ़ोन बिस्तर पर है। और वो यहाँ नहीं है। और मेरी बहन का पेट आपका और रागू नहीं झेल सकता।”
“आपकी बहन ने मेरा रागू ज़रा भी नहीं खाया।”
“सूँघा है। काफ़ी है।”
जीनो खड़े हो गए। वो पचास की उम्र से छोटे हो गए थे, पर खड़ा होना उन्हें अब भी आता था।
“बहनजी, जब आपका परिवार इस शहर में आया, मैंने आपके लिए अपना घर खोला। अपनी मेज़ खोली। गुरुवार को मेरी बहनों ने आपके बेटे के लिए अपने हाथों से चार सौ तोर्तेल्लीनी बनाए। अपने हाथों से। और कल रात, मेरी मेज़ पर, आपने वेटर से कुछ बिना मीट का माँगा।”
“माँगा।”
“क्यों?”
असुन्ता ने उन्हें देखा। एक पल के लिए जीनो को लगा कि वो कोई सच्ची बात कहने वाली हैं। वो उनके चेहरे पर थी, जैसे गिरने से पहले बारिश आसमान में होती है।
फिर सामने का दरवाज़ा खुला, और मारेशियाल्लो अंदर आया।
उसकी हालत बहुत ख़राब लग रही थी। उसकी वर्दी पीठ पर धूल से भरी थी, जैसे वो सड़क पर पड़ा रहा हो, और उसकी क़मीज़ पर चिकनाई का एक छोटा-सा दाग़ था। पर वो लॉबी में ऐसे चला जैसे कोई ख़बर लेकर आया हो, और वहाँ मौजूद हर इंसान उसकी तरफ़ मुड़ गया।
“मिस्टर रॉसी,” मोरेत्ती बोला। “मुझे पता है आपका तोहफ़ा किसने लिया।”
“किसने?”
“दो आदमी। मार्को बेल्लांदी और लेओ फ़ेर्री।”
गमले वाले ताड़ की तरफ़ से एक आवाज़ आई। ज़िया कार्ला थीं।
“मार्को बेल्लांदी,” वो बोलीं। “सूटों वाला।”
“आप उसे जानती हैं?”
“बोलोन्या में सब उसे जानते हैं। 2011 में मैंने उसे कुत्तों के लिए पिज़्ज़ा रेस्टोरेंट खोलने को चार सौ यूरो उधार दिए थे।”
“क्या?”
“कुत्तों के लिए पिज़्ज़ा। बिना प्याज़ के। कुत्तों के लिए। कहता था यही भविष्य है।” ज़िया कार्ला पीछे टिक गईं। “भविष्य नहीं था।”
“वो अब कहाँ हैं?” जीनो बोले।
“चौक में मेरे हाथ से निकल गए,” मोरेत्ती बोला। उसने एक पल के लिए क़मीज़ पर लगे चिकनाई के दाग़ को छुआ, जैसे कुछ याद कर रहा हो। “पर वस्तु अब भी उनके पास है। और मुझे दो बातें और पता हैं। एक: उन पर मास्सिमो ग्रांदी नाम के एक आदमी का पैसा बाक़ी है। ग्यारह हज़ार चार सौ यूरो, आधी रात तक।”
जीनो को अपनी कलाई बीप करती महसूस हुई।
“मास्सिमो ग्रांदी,” वो बोले। “क्वाद्रिलातेरो वाला क़साई।”
“हाँ।”
“वो मेरी पोती का गॉडफ़ादर है। आज रात मुख्य मेज़ पर बैठेगा। तोर्तेल्लीनी का भरावन उसी ने बनाया है।”
मोरेत्ती ने धीरे-धीरे सिर हिलाया, जैसे ये किसी के लिए बुरी ख़बर हो पर उसे अभी पक्का न पता हो कि किसके लिए। “दूसरी बात। वो आपका तोहफ़ा बेचने का प्लान बना रहे हैं। आज नहीं। सोमवार को। यूनिवर्सिटी को।”
“यूनिवर्सिटी!”
“और आज रात वो रिमिनी जा रहे हैं।”
जीनो बैठ गए। उनकी छड़ी ने संगमरमर पर ठक की। उन्होंने असुन्ता एस्पोज़ितो की तरफ़ देखा, जो अब भी वहीं खड़ी थीं, अपने गहरे हरे कपड़ों में, हैंडबैग के साथ।
“तो,” असुन्ता बोलीं। “ज़रा समझूँ। पुलिस ने चोर ढूँढ़ लिए।”
“हाँ,” मोरेत्ती बोला।
“और फिर खो दिए।”
“कुछ देर के लिए।”
“एक चौक में।”
“बहुत बड़ा चौक है।”
“और पुलिस को नहीं पता कि मेरा बेटा कहाँ है।”
“बहनजी, आपका बेटा पुलिस का मामला नहीं है। शादी के दिन दूल्हा…”
“और पुलिस ने मेरे बेटे को इस होटल से बाहर जाते नहीं देखा, जबकि वो दस बजे दरवाज़े पर खड़ी पार्किंग चालान पर बहस कर रही थी।”
मोरेत्ती ने मुँह खोला, और बंद कर लिया।
जीनो ने असुन्ता को देखा। असुन्ता ने जीनो को देखा। नेपल्स से ट्रेन आने के बाद पहली बार वो दोनों एक ही चीज़ को देख रहे थे, और वो चीज़ थी काराबिनिएरी का एक मारेशियाल्लो जिसकी क़मीज़ पर चिकनाई लगी थी।
“नेपल्स में,” असुन्ता बोलीं, “पुलिस बिल्कुल ऐसी ही है।”
“बोलोन्या में,” जीनो बोले, “और बुरी है। उसके पास यूनिवर्सिटी है।”
तब उनके बीच कुछ गुज़रा। वो दोस्ती नहीं थी। वो वो चीज़ थी जो दोस्ती से पहले आती है, जब दो बूढ़े लोगों को पता चलता है कि वो एक ही चीज़ से नफ़रत करते हैं।
“तो हम ख़ुद करेंगे,” असुन्ता बोलीं।
“हम ख़ुद करेंगे,” जीनो बोले। “मेरा परिवार तोहफ़ा ढूँढ़ेगा। आपका परिवार लड़के को ढूँढ़ेगा।”
“और अगर मेरे परिवार ने तोहफ़ा ढूँढ़ लिया?”
“तो मैं शुक्रिया कहूँगा। एक बार। अकेले में।”
“और अगर आपके परिवार ने मेरा बेटा ढूँढ़ लिया?”
जीनो ने सोचा। “तो मैं उसे आपके पास ले आऊँगा,” उन्होंने कहा, “और फ़ोटो होने के बाद तक उस पर नहीं चिल्लाऊँगा।”
असुन्ता ने हाथ बढ़ाया। जीनो ने थाम लिया। वो एक छोटा, मज़बूत हाथ था, और उसने उनका हाथ ठीक उतनी ही ज़ोर से पकड़ा जितनी ज़ोर से उन्होंने उसका।
उनके पीछे लिफ़्ट के दरवाज़े खुलते और बंद होते रहे, खुलते और बंद होते रहे, क्योंकि कोई अंदर नहीं जा रहा था।
जब मारेशियाल्लो चला गया और दोनों बैठकें मिलकर एक बैठक बन गईं, जो और ज़्यादा शोर वाली थी, जीनो ने फ़ोन निकाला और फ़ोन करने के लिए खिड़की के पास खड़े हो गए।
एक काम और बाक़ी था। तीन बजे क्वाद्रिलातेरो से होटल में पार्मिजानो-रेजानो का एक पूरा पहिया आने वाला था, छत्तीस महीने पुराना, चालीस किलो का, रिसेप्शन की मेज़ के बीच के लिए। ये मास्सिमो का अपनी धर्म-बेटी को तोहफ़ा था। ये तब से उसके तहख़ाने में था जब जूलिया सत्ताईस साल की थी।
फ़ोन पर दो घंटियाँ बजीं।
“जीनो,” मास्सिमो ग्रांदी बोला। उसकी आवाज़ नरम और गर्म थी, हमेशा की तरह। “मेरे दोस्त। चीज़ तैयार है। तीन बजे। हमारी बच्ची कैसी है?”
“मास्सिमो।” जीनो ने बाहर पोर्टिको को देखा, पत्थरों पर सूखती बारिश को। “उन्होंने मेरी एक चीज़ ले ली।”
उन्होंने उसे बताया। तोहफ़ा। शेल्फ़। दो आदमी। नाम।
लाइन के दूसरी तरफ़ चुप्पी छा गई। वो इतनी लंबी चली कि जीनो ने फ़ोन देखा कि कहीं कॉल कट तो नहीं गई।
फिर मास्सिमो फिर बोला, इतनी नरमी से जैसे कोई आदमी सोते बच्चे को लिटाता है।
“तो फिर हम दोनों का क़र्ज़ बाक़ी है, जीनो।”
You're all caught up. Next episode coming soon



