Chapter 2

एपिसोड 2 — ऑर्गेनिक कीचड़

ग्यारह बजे तक धूप चढ़ चुकी थी और ट्रिप के एक घंटे बाद क्लास ढीली पड़ गई थी, और डेला समझ गई कि टूर लीड या तो सबको पकड़कर रखती है या खो देती है।

उसका कॉलर अब भी हंस की वजह से गीला था। रास्ते में उसने तय कर लिया था कि इस गीलेपन को दाग़ नहीं, तमग़ा मानेगी, और जब रितिका ने परेशान चेहरे से उसकी तरफ़ इशारा किया तो उसने कह दिया था कि पानी दुनिया का सबसे पुराना क्लीनर है और उसे इसकी ख़ुशी है। रितिका क़ायल नहीं लगी थी, पर रितिका हर चीज़ की फ़िक्र करती थी, और डेला को स्तनधारियों के बाड़े तक पहुँचना था।

दरियाई घोड़ा ग्रीनवुड के निचले हिस्से में रहता था, जहाँ रास्ते ढलान पर उतरकर एक चौड़े बाड़े तक जाते थे जिसके आगे बस एक स्टील की रेलिंग थी। रेलिंग के नीचे ज़मीन गिरकर कीचड़ और ठहरे पानी के एक चौड़े भूरे गड्ढे में बदल जाती थी, और गड्ढे में, ज़्यादातर डूबा हुआ, दरियाई घोड़ा पड़ा था, जो रास्ते से जानवर कम और साँस लेता हुआ एक गीला सलेटी पत्थर ज़्यादा लगता था।

क्लास रेलिंग के साथ लाइन में खड़ी हो गई। डेला बीच में खड़ी हुई, जहाँ लीड को खड़ा होना चाहिए, और उसे समझ आया कि एक दिक़्क़त है। शांत, रौबदार मौजूदगी के बारे में उसे जो कुछ आता था, उसका ज़्यादातर हिस्सा वो हंस पर ख़र्च कर चुकी थी, दरियाई घोड़ा कुछ कर नहीं रहा था, और कोई लीड रेलिंग पर चुपचाप खड़ी नहीं रह सकती जबकि क्लास ऊब रही हो और किसी राइवल के फ़ोन की तरफ़ देखने लगे।

तो उसने बेफ़िक्र दिखने का फ़ैसला किया। गहरे लोग, उसने देखा था, कुदरत के बीच बेफ़िक्र रहते हैं, क्योंकि कुदरत उनका ड्रॉइंग रूम होती है। वो रेलिंग पर ऐसे टिकेगी जैसे कोई अपने फ़र्नीचर पर टिकता है, दरियाई घोड़े के बारे में कोई ठहरी हुई, सच्ची बात कहेगी, और क्लास देखेगी एक लड़की जो पूरी तरह अपने घर में है।

उसने रेलिंग पर अपना वज़न डाल दिया।

ग्रीनवुड की रेलिंग अपने खंभों से बहुत पुराने म्युनिसिपल बोल्टों से जुड़ी थी, और उसने अपने वक़्त में बहुत से स्टूडेंट्स का बोझ उठाया था, पर किसी ऐसी स्टूडेंट का कभी नहीं जो बेफ़िक्री का नाटक करने के लिए उस पर पूरा वज़न और पूरा भविष्य डालकर टिकी हो। वो अपने खाँचों में लंबी, धीमी, लोहे वाली आवाज़ के साथ घूमी, ऊपर वाली रेलिंग नीचे और बाहर गड्ढे के ऊपर झूल गई, और डेला उसके साथ चली गई।

हवा में उसे एक पल मिला। उस पल में उसने बहुत सी बातें बहुत तेज़ी से सोचीं, और सबसे तेज़ बात ये थी कि सब देख रहे हैं।

फिर वो मुँह के बल गड्ढे में गिरी। कीचड़ ने उसे कोहनियों तक निगल लिया, बदबू आई, और तीन मीटर दूर दरियाई घोड़े ने एक आँख खोली।

रेलिंग के साथ-साथ सन्नाटा छा गया। ये उन इकतीस लोगों का ख़ास सन्नाटा था जिन्होंने अभी-अभी अपनी टूर लीड को दरियाई घोड़े के गड्ढे में गिरते देखा है और इंतज़ार कर रहे हैं कि कोई बताए कि क्या महसूस करना है। ऊपर, टूटी रेलिंग पर, सिद्धार्थ का फ़ोन ऊपर और स्थिर था, और वो एक शब्द नहीं बोल रहा था, क्योंकि ज़रूरत ही नहीं थी, वीडियो उसकी जगह बोल रहा था। ग्रीनवुड म्युनिसिपल ज़ू के कीचड़ में हाथों और घुटनों के बल पड़ी डेला समझ गई कि यही वो पल है। यहीं भेस उतरना था। सीने तक दरियाई घोड़े के कीचड़ में सनी, बर्बाद सफ़ेद कपड़ों वाली लड़की, मिसेज़ वैंस की चिट्ठी वाली लड़की नहीं हो सकती थी। वो उठकर रो सकती थी, या उठकर अपने आप पर हँस सकती थी और हमेशा के लिए कीचड़ में गिरने वाली लड़की बन सकती थी।

वो धीरे-धीरे उठी। कीचड़ भरे हाथ की पीठ से आँखों का कीचड़ पोंछा, जिससे कोई फ़ायदा नहीं हुआ। उसने एक सेकंड मिसेज़ वैंस को देखा, जो रेलिंग पर एकदम स्थिर खड़ी थीं, हाथ गले पर।

“लोग इसके पैसे देते हैं,” डेला ने कहा।

सन्नाटे की शक्ल बदल गई।

“शहरों में,” डेला बोलती रही, टूटी रेलिंग की तरफ़ किनारे पर बिना जल्दी के चढ़ते हुए, जैसे दरियाई घोड़े के गड्ढे से निकलना किसी प्लान का दूसरा हिस्सा हो जिसका पहला हिस्सा उसमें गिरना था, “ऐसी जगहें हैं जो ठीक इसी चीज़ के बहुत पैसे लेती हैं। मड बाथ। उसे ट्रीटमेंट कहते हैं।” वो रेलिंग तक पहुँचकर खड़ी हो गई, टपकती हुई, रिबन से जूतों तक सलेटी-भूरी, और क्लास का सामना उस शांत, गहरी नज़र से किया जो वो सुबह भर बनाती रही थी। “ये गंदगी नहीं है। ये मिनरल है। इसी गड्ढे में दरियाई घोड़ा धूप में अपनी खाल को फटने से बचाता है। ये खाल का कुदरती इंसुलेशन है। मैं गिरी नहीं। मैंने बस जानवर से सीखने का फ़ैसला किया।”

कोई कुछ नहीं बोला। फिर फ़रहान ने पूछा, “सच में?”

“ये धरती का सबसे पुराना कूलिंग सिस्टम है,” डेला ने कहा, जिसे नहीं पता था कि ऐसा है या नहीं, और जो घंटों पहले उस मोड़ से आगे निकल चुकी थी जहाँ पता होना मायने रखता था।

फ़रहान ने गड्ढे को देखा। फिर अपनी सफ़ेद, साफ़ यूनिफ़ॉर्म को, जो अचानक उसे हाथ से निकलता मौक़ा लगने लगी। रितिका उसकी आस्तीन पकड़ पाती, उससे पहले वो टूटी रेलिंग फाँद गया, ट्रीटमेंट लेने वाले की सोची-समझी सावधानी से कीचड़ में बैठ गया, और असली खोज वाली आवाज़ में बोला, “ओह,” और फिर दो और उसके पीछे रेलिंग फाँद गए।

रितिका डेला की तरफ़ मुड़ी, उस चेहरे के साथ जो किसी छोटी चीज़ को बड़ी बनते देख रहा हो। “इन्हें रोको,” उसने कहा।

डेला ने देखा, तीन क्लासमेट सेंट ज्यूड्स सीनियर सेकेंडरी की सफ़ेद यूनिफ़ॉर्म में दरियाई घोड़े के गड्ढे में बैठे थे, स्पा जैसी गंभीरता से अपनी बाँहों पर कुदरती इंसुलेशन मल रहे थे, और दरियाई घोड़ा अपनी एक खुली आँख से उन्हें देख रहा था और हिलने से इनकार कर रहा था।

“ये सीख रहे हैं,” डेला ने कहा।

मिसेज़ वैंस रेलिंग के साथ चलती आईं। उनके जूते डेला के टपकते जूतों से ज़रा पहले रुक गए। उन्होंने देर तक डेला को देखा, रिबन से जूतों तक, पूरा का पूरा, और डेला ने वो नज़र वैसे ही झेली जैसे हंस को झेला था, बिना हिले, ये देखने के इंतज़ार में कि टीचर किस तरफ़ झुकेंगी।

“मैं उन्नीस साल से पढ़ा रही हूँ,” मिसेज़ वैंस ने धीरे से कहा। “आज तक एक भी बच्चे को उस गड्ढे में नहीं उतार पाई।”

वो कीचड़ वाले तीनों को देख रही थीं, और उनके चेहरे पर कुछ ऐसा था जिसका डेला ने हिसाब नहीं लगाया था। अचरज।

“तुम्हारे पास एक हुनर है,” मिसेज़ वैंस ने कहा। “तुम इनका डर निकाल देती हो।”

नीचे गड्ढे में फ़रहान कीचड़ में लेट गया और आसमान को उस लड़के के सुकून से देखने लगा जिसे बताया गया हो कि कोई चीज़ उसके लिए अच्छी है और जिसने मान लेने का फ़ैसला कर लिया हो। ऊपर, टूटी रेलिंग पर, फ़ोन रिकॉर्ड करता रहा, और डेला अपने बर्बाद सफ़ेद कपड़ों में खड़ी समझ गई कि वो पकड़ी नहीं गई थी। उस पर यक़ीन कर लिया गया था। और ये बदतर था।

“चलें आगे,” उसने कहा, “इससे पहले कि ये ख़ुद को पूरा इंसुलेट कर लें।”

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