Chapter 1

गुड मॉर्निंग, बैठ जाओ। बैठ जाओ!

गलियारे में फ़र्श की पॉलिश की गंध थी। मिस ढिल्लों सबसे पहले पहुँच गई थीं और ग्रेड 2 के कमरे के बाहर दीवार पर लगी अपनी क्लास की लिस्ट पढ़ रही थीं, जब मिसेज़ सांतोस ने उन्हें ढूँढ़ लिया।

“पहला दिन?” मिसेज़ सांतोस ने कहा।

“पहला दिन।”

“आते हुए बोर्ड के पास से गुज़रीं?”

“कौन-सा बोर्ड?”

“वो जिस पर लिखा है कि हम कनाडा का सबसे बदनाम शहर हैं।”

“मैं यहीं पली-बढ़ी हूँ,” मिस ढिल्लों बोलीं। “अब वो दिखता ही नहीं।”

“बीस साल से मैं इस स्कूल में काम कर रही हूँ, और सबसे बड़ा अपराध जो मैंने देखा वो एक लड़का था जिसने बाँसुरी दाँतों से आधी काट दी थी। पर बोर्ड से टूरिस्ट ख़ुश रहते हैं, तो बस।” मिसेज़ सांतोस ने उनके कंधे के ऊपर से लिस्ट पढ़ी, वैसे ही जैसे वो हर नए परिवार को पढ़ती थीं, जैसे मौसम आ रहा हो। उनकी उँगली बीच के पास रुकी। “अच्छा। गिल।”

“कबीर गिल।”

“परिवार को जानती हो?”

“इस तरह के परिवार को जानती हूँ।”

“इस्त्री किए कपड़े,” मिसेज़ सांतोस बोलीं।

“इस्त्री किए कपड़े। सामने वाला कमरा उन मेहमानों के लिए साफ़ रखा हुआ जो कभी आते ही नहीं।”

“तुम्हारे अपने लोग?”

“एक पीढ़ी पहले।” मिस ढिल्लों ने लिस्ट को लपेटकर नली बनाया और फिर खोल दिया। “मैंने बहुत साल लगाए कुछ ऐसा बनने में जो वो परिवार नहीं है।”

“वो तुम्हें फिर भी ढूँढ़ लेगा। वो हमेशा ढूँढ़ लेते हैं।” घंटी बजी। “साँस लो।”

“मैं साँस लेने वाली एक्सरसाइज़ करती हूँ। चार गिनती अंदर, चार रोको, चार बाहर।”

“थोड़ी बचाकर रखना,” मिसेज़ सांतोस बोलीं, और चली गईं।

ग्रेड 2 के कमरे में एक सीलिंग फ़ैन था जो सिर्फ़ बाईं तरफ़ घूमता था, जैसे उसने बहुत पहले तय कर लिया हो और अब टस से मस नहीं होगा। बच्चे हल्के-फुल्के और चमकते हुए आए, हुडी और जलती बत्तियों वाले जूतों में, और बैठ गए। मिस ढिल्लों ने क्लिपबोर्ड उठाया।

“आरव।”

“हाज़िर, मिस ढिल्लों।” आरव एकदम सीधा बैठा था। उसके पेंसिल बॉक्स की दो मंज़िलें थीं।

“टायलर।”

“हाज़िर।” टायलर एक छोटी काली नोटबुक में लिख रहा था।

“क्या लिख रहे हो?”

“कौन आया है। और कौन बोल रहा है जब उसे नहीं बोलना चाहिए।”

“वो मेरा काम है, टायलर।”

“किसी को तो आपका काम चेक करना चाहिए,” टायलर ने प्यार से कहा।

“मैडिसन। कोल। पेटन।”

“हाज़िर। हाज़िर। हाज़िर।”

सब बढ़िया चला, दूसरी लाइन तक।

“कबीर।” कुछ नहीं। “कबीर गिल?”

“आ जाएगा,” आरव बोला। “हमेशा आता है। बस तेज़ नहीं है।”

कबीर नौ बजकर नौ मिनट पर आया। उसने जल्दी नहीं की। वो पूरी बिल्डिंग का सबसे साफ़-सुथरा बच्चा था, इस्त्री किया, कंघी किया, पोंछकर चमकाया हुआ, ऐसे कमरे में जो लंबे वीकेंड के कपड़ों में था, और वो इसे बिना ध्यान दिए पहने था, जैसे कोई अपना चेहरा पहनता है।

“तुम लेट हो,” मिस ढिल्लों बोलीं। प्यार से। पहला दिन।

“हाँ,” कबीर ने माना, और बैठ गया।

वो सॉरी का इंतज़ार करती रहीं। वो कनाडाई थीं; उन्हें सॉरी पर बहुत भरोसा था। सॉरी नहीं आया।

“जब लेट हो, तो मुझे बताओ क्यों। ताकि मैं मार्क कर सकूँ।”

“क्या मार्क?”

“कि तुम यहाँ हो या नहीं।” उन्होंने क्लिपबोर्ड उठाया, उसे वो लिस्ट दिखाने के लिए जो ऐसी बातें तय करती थी।

“पर मैं यहाँ हूँ।”

“इसीलिए तो तुम्हें यहाँ मार्क कर रही हूँ।”

“आप मुझे देख सकती हैं।”

“देख सकती हूँ।”

“तो आपको पहले से पता है।” उसने ये नरमी से कहा, वैसे जैसे किसी ऐसे को कुछ समझाया जाता है जो आपको अच्छा लगता हो। “तो लिस्ट को भी क्यों पता होना चाहिए?”

“क्योंकि स्कूल रिकॉर्ड रखता है।”

“किसका?”

“कि कौन आया।”

“पर जो भी आया है वो यहीं है। आप देख सकती हैं।” वो अपनी कुर्सी में घूमा और कमरे को देखा, ये दिखाने के लिए कि देखना कितना आसान है। “आरव यहाँ है। टायलर यहाँ है, लिखता हुआ। लिस्ट तो बस उसके काम की है जो नहीं आया। और वो उसे पढ़ने के लिए यहाँ है ही नहीं। तो लिस्ट किसी से बात नहीं कर रही।”

पीछे टायलर ने ये लिख लिया।

“ये नियम है,” मिस ढिल्लों बोलीं। ये वही वाक्य था जिसके बारे में उन्होंने कॉलेज में ख़ुद से वादा किया था कि किसी बच्चे पर कभी इस्तेमाल नहीं करेंगी। नौ बजकर नौ मिनट तक वो इसे इस्तेमाल कर चुकी थीं।

“किसका नियम?”

“स्कूल का।”

“स्कूल ने मुझे देखा है? या सिर्फ़ लिस्ट ने?”

“उसके पास तुम्हारा नाम है।”

“नाम इंसान नहीं होता। आप मेरा नाम चाँद पर लिख सकती हैं। तब भी मैं चाँद पर नहीं होऊँगा।”

पीछे टायलर ने लिखा चाँद।

बाहर एक जेट गुज़रा, नीचे और ज़ोर से, एयरबेस वालों में से एक।

“बस हवाई जहाज़ हैं,” आरव फुसफुसाया। “कुछ दिन बाद सुनाई देना बंद हो जाते हैं।”

“मुझे नहीं होगा,” कबीर बोला।

मिस ढिल्लों ने क्लिपबोर्ड नीचे रख दिया।

“कबीर। गुड मॉर्निंग।”

“गुड मॉर्निंग, मिस ढिल्लों।”

“बैठ जाओ।”

वो पहले से बैठा था। उन्होंने ख़ुद को सुना, और ख़ुद को रोक नहीं पाईं।

“बैठ जाओ।”

उन्होंने उसे हाज़िर मार्क किया। टिक साफ़ नहीं बना, साफ़ नई लिस्ट पर पहला टेढ़ा निशान, और उसका मतलब था कि एक लड़का यहाँ था, लिस्ट माने या न माने।

साल की पहली सुबह के नौ बजकर नौ मिनट हुए थे, और मिस ढिल्लों एक ऐसी बहस हार चुकी थीं जिसे करने के लिए वो कभी राज़ी ही नहीं हुई थीं, इस्त्री की क़मीज़ वाले एक लड़के से। उन्होंने घड़ी देखी। उन्होंने उन बाईस चेहरों को देखा जो इंतज़ार कर रहे थे कि वो किसी चीज़ की इंचार्ज बनें। और उन्होंने तय किया कि फिर से शुरू करेंगी, साफ़-सुथरे ढंग से, एक ऐसी एक्टिविटी से जो इतनी सीधी, इतनी सुरक्षित, इतनी प्यारी हो कि दूसरी लाइन वाला लड़का भी उस पर बहस करने का कोई रास्ता न ढूँढ़ सके।

उन्हें जल्दी पता चलने वाला था कि ऐसी कोई चीज़ होती ही नहीं।

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