Chapter 3

चोरी हो गई

वर्कबुक नीली थी, और उसे आरव के बैग में होना चाहिए था, और वो आरव के बैग में नहीं थी।

आरव चार बार बैग देख चुका था। वो पाँचवीं बार देख रहा था जब कबीर उसके बग़ल में बैठ गया।

“तुम वो चेहरा बना रहे हो,” कबीर बोला।

“मैं कोई चेहरा नहीं बना रहा।”

“तुम वो चेहरा बना रहे हो जो बाथरूम में रोने से पहले बनाते हो।” कबीर ने उसके साथ बैग में झाँका। “क्या ग़ायब है?”

“मेरी वर्कबुक। नीली वाली। होमवर्क उसी में है।” आरव की आवाज़ बहुत छोटी हो गई। “मैंने होमवर्क किया था। सारा किया था। किताब रसोई की मेज़ पर छोड़ आया।”

“तो मिस ढिल्लों को बता दो कि घर पर छोड़ आए।”

“नहीं बता सकता।” आरव ने उसे ऐसे देखा जैसे उसने कोई गंदी बात कह दी हो। “मेरा होमवर्क कभी नहीं छूटा। एक बार भी नहीं। अगर मैंने कहा कि भूल गया, तो मैं भूलने वाला बन जाऊँगा। समझे?”

कबीर ने इस पर सोचा। वो इसे ठीक-ठीक समझा नहीं, वैसे ही जैसे वो नहीं समझता था कि उसकी मम्मी ऐसे कपड़ों पर इस्त्री क्यों करती हैं जिन्हें कोई चेक नहीं करेगा। पर उसने इसे पहचान लिया। ये वही डर था, बस छोटा कोट पहने हुए।

“ठीक है,” कबीर बोला। “तो तुम भूले नहीं। चोरी हो गई।”

“तुम ऐसे ही नहीं कह सकते कि चोरी हो गई।”

“क्यों नहीं?”

“क्योंकि नहीं हुई।”

“किसी ने तुम्हें मेज़ पर छोड़ते देखा?”

“नहीं।”

“किसी ने उसे चोरी होते देखा?”

“नहीं, क्योंकि वो चोरी नहीं हुई।”

“तो यहाँ से दोनों बातें बिल्कुल एक जैसी दिखती हैं,” कबीर बोला। “किसी ने कोई भी नहीं देखी। तो हम चुन सकते हैं।” उसने ये नरमी से कहा, वैसे जैसे कल हाज़िरी समझाई थी। “एक का मतलब है तुम भूलने वाले लड़के हो। दूसरी का मतलब है तुम ऐसे लड़के हो जिसके साथ चीज़ें होती हैं। मैं दूसरी चुनता।”

आरव ने बहस करने के लिए मुँह खोला और ये देखकर घबरा गया कि उसे इसमें कोई छेद नहीं मिल रहा। कबीर के आसपास के लोगों के साथ ये होने लगा था।

मिस ढिल्लों हाथ आगे बढ़ाए लाइनों में चलती आईं। “वर्कबुक डेस्क पर रखो, प्लीज़। नीली वाली।”

नीली किताबें एक के बाद एक निकलती गईं, और आरव की लाइन पास आती गई, और आरव का रंग उस लड़के जैसा हो गया जो अभी पकड़ा जाने वाला हो।

“आरव?”

“चोरी हो गई,” कबीर बोला।

मिस ढिल्लों रुक गईं। “कबीर।”

“इसकी वर्कबुक। किसी ने ले ली। कल रात से आज सुबह के बीच।” कबीर शांत था। “बहुत गंभीर मामला है। ये बदनाम शहर माना जाता है। बोर्ड पर लिखा है।”

मिस ढिल्लों ने आरव को देखा, जो उनकी तरफ़ देख नहीं पा रहा था, और वो कोई डेढ़ सेकंड में पूरी बात समझ गईं, क्योंकि वो भी कभी ऐसी बच्ची थीं जो होमवर्क कभी नहीं भूलती थी, बिल्कुल उसके जैसे घर में। उन्हें पता था कि किताब उसकी रसोई की मेज़ पर है। उन्हें पता था कि वो मामूली होने से अच्छा लुट जाना पसंद करेगा।

वो बात वहीं ख़त्म कर सकती थीं। इसकी जगह उन्होंने ख़ुद को कहते सुना, “किसने चुराई?”

वो बाद में इस सवाल के बारे में सोचेंगी। उनके पास लेसन प्लान था, और उन्होंने उसे ये जानने के लिए नीचे रख दिया था कि कबीर उसकी जगह क्या करेगा। उन्हें धीरे-धीरे समझ आ रहा था कि कबीर का सबसे बड़ा ख़तरा यही था।

उन्होंने लेसन प्लान डेस्क पर छोड़ दिया। उसे दोबारा नहीं उठाया। बाईस बच्चे आगे झुक गए, क्योंकि अचानक गोफ़र रिज में सुलझाने को एक अपराध था, और इससे ज़रा भी फ़र्क़ नहीं पड़ता था कि वो कभी हुआ ही नहीं था।

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