Chapter 21

चार इंच

कबीर सर्दियों में क्रिकेट खेलता था क्योंकि किसी ने उसे बताया नहीं था कि वो नहीं खेल सकता, और जब तक किसी ने बताया, बहुत देर हो चुकी थी; उसे उससे प्यार हो चुका था।

वो उसे अकेला खेलता था, अर्धचंद्राकार गली में, एक ऐसे बल्ले से जो एक मामा ने भारत से भेजा था और दो नाप बड़ा था, और एक गंजी हो चुकी टेनिस बॉल से, जबकि गली के ऊपर बाक़ी लड़के रोड हॉकी खेलते थे, जो सर्दियों का सही खेल था, वो खेल जिस पर गली कबीर के पैदा होने से पहले सहमत हो चुकी थी। उन्होंने उसे एक बार खेलने बुलाया था। उसने उनसे पूछा था कि जाल के पीछे कुछ क्यों नहीं है, कि पीछे से गोल और मिस एक जैसे दिखते हैं, और कोई पक्का कैसे हो सकता है। उन्होंने उसे फिर नहीं बुलाया। तो वो क्रिकेट खेलता था, अकेला, और ख़ुद से कहता था, ज़्यादातर, कि ये बेहतर सौदा है।

गली में क्रिकेट की दिक़्क़त ये है कि अच्छी लगी गेंद ठीक एक जगह जाती है, और वो जगह है मिस्टर डर्कसन की बाड़ के उस पार।

मिस्टर डर्कसन रिटायर थे, और मैनिटोबा होते हुए आए डच, और बाड़ उन्होंने ख़ुद बनाई थी, और बर्फ़ के नीचे एक लॉन रखते थे जिसकी वो चारों मौसम ऐसे रक्षा करते थे जैसे सर्दी कुछ दिनों की बात हो, जो सस्केचवान में नहीं होती। जब कोई गेंद उनके यार्ड में आती, मिस्टर डर्कसन उसे रख लेते। ये गली का सबसे पुराना क़ानून था।

टेनिस बॉल उस पार चली गई। कबीर बाड़ तक गया।

“मिस्टर डर्कसन। मेरी गेंद आपके यार्ड में है।”

“पता है।” मिस्टर डर्कसन के मुट्ठी में वो पहले से थी। “अब ये मेरी गेंद है।”

“पर है नहीं। ये मेरी गेंद है। ये आपके यार्ड में चली गई, पर अब भी मेरी है। कोई चीज़ बस लुढ़कने से मालिक नहीं बदलती।”

“मेरे यार्ड में बदलती है।”

“क्यों?”

“मेरा यार्ड, मेरे नियम।” और वो मुड़े और अपने गैराज में चले गए, और बंद होते दरवाज़े से कबीर ने कोने में एक बाल्टी देखी।

कबीर मेरा यार्ड, मेरे नियम नहीं मानता था। वो वजह नहीं थी। वो बस ना कहने का ज़्यादा ऊँचा तरीक़ा था, और कबीर ने पूरी ज़िंदगी आवाज़ की ऊँचाई से प्रभावित होने से इनकार किया था।

तो उसने एक जाँच शुरू की, वैसे जैसे वो सारी जाँचें शुरू करता था, यानी पूरी तरह से और बिना किसी अनुपात की समझ के।

उसने रसोई की दराज़ से फ़ीता निकाला। उसने बाड़ नापी, और फ़ुटपाथ, और बाड़ से ड्राइववे की उस दरार तक की दूरी जिसे सब गिल परिवार की ज़मीन का किनारा मानते थे। उसने अंक एक नोटबुक में लिखे, क्योंकि टायलर ने उसे सिखाया था कि लिखी हुई सच्ची बात बस कही हुई सच्ची बात से भारी होती है। उसने पापा से पूछा कि प्रॉपर्टी लाइन क्या होती है, और पापा ने, थके हुए, बताया कि वो सरकार की खींची एक अदृश्य लकीर है जो तय करती है कि किसकी बर्फ़ किसकी है, और कबीर ने कहा ये तो बनाई हुई बात लगती है, और पापा ने कहा ज़्यादातर ज़रूरी चीज़ें ऐसी ही होती हैं।

तीसरे दिन तक कबीर के पास केस था।

“मिस्टर डर्कसन।” वो अपनी नोटबुक लिए बाड़ पर खड़ा था। “मैंने नापा। आपकी बाड़ हमारी तरफ़ चार इंच अंदर है। मेरे पास अंक हैं। मतलब आपके यार्ड के चार इंच असल में हमारा यार्ड हैं, और मुझे लगता है मेरी गेंद उन चार इंचों में गिरी, तो मुझे लगता है मेरी गेंद हमारे यार्ड में गिरी, जो आपके यार्ड में था, जो असल में हमारा यार्ड था।” उसने ख़ुश होकर ऊपर देखा। “आप उस जगह पर गेंदें ज़ब्त करते रहे हैं जो हमारी है। शायद बरसों से। मुझे वो सब वापस चाहिए। मैं थैला लाया हूँ।”

मिस्टर डर्कसन ने नोटबुक को देखा। उन्होंने लड़के को देखा। वो एक पल चुप रहे, और कबीर ने वो ख़ास रोमांच महसूस किया जो उसे तब होता था जब कोई बड़ा वजहों से ख़ाली होने वाला होता और सच्ची बात बाहर गिरने वाली होती।

“नहीं,” मिस्टर डर्कसन बोले।

“पर चार इंच हमारे हैं,” कबीर बोला।

“नहीं।” और वो अंदर चले गए।

ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। कबीर ने एक टीचर, एक सब्स्टिट्यूट, एक प्रिंसिपल, और पूरी असेंबली के पैरों तले से ज़मीन खींच ली थी। उसके पास सच्चे अंकों से भरी एक नोटबुक थी। और मिस्टर डर्कसन ने वो सब देखा था और नहीं कहा था, वैसे जैसे मौसम को ना कहा जाता है, और अंदर चले गए थे, और उस नहीं में कोई छेद नहीं था, क्योंकि वो वजहों से नहीं बना था। वो किसी और चीज़ से बना था, और कबीर के पास अभी उसके लिए कोई औज़ार नहीं था।

उसे कोई दूसरा औज़ार ढूँढ़ना होगा। वो एक ढूँढ़ने घर चला गया।

Chapter 21 of 22 · swipe or ← → keys
How did that chapter land?
Enjoying it? Rate this chapter
Share this chapter