Chapter 2

पैसा गर्म क्यों है?

शनिवार, सुबह 7:05। क्वाद्रिलातेरो।

जब वो अंदर आए तब मास्सिमो ग्रांदी एक चाकू पर धार लगा रहा था, और वो रुका नहीं।

“लेओ,” उसने कहा। “मार्को। अंदर आओ। शटर का ध्यान रखना, आधा ही उठा है। सिर का ध्यान रखना। हैम का ध्यान रखना।”

लेओ ने हैम का ध्यान रखा। वो छत से चालीस और हैमों के बग़ल में लटका था, और हर एक उसकी कार से महँगा था। दुकान में नमक और काली मिर्च और ठंडे पत्थर की गंध थी। काउंटर पर एक बच्चे जितनी बड़ी पूरी मोर्ताडेला पड़ी थी।

मार्को ने हैम का ध्यान नहीं रखा। वो उससे टकराया, उससे माफ़ी माँगी, और अपनी जैकेट ठीक की। जैकेट पॉलिएस्टर की थी, सरसों के रंग की, और उसने उसे इसलिए ख़रीदा था क्योंकि एक फ़िल्म में एक आदमी ने वैसी ही पहनी थी। फ़िल्म वाला आदमी सुबह सात बजे पसीने में नहीं भीग रहा था।

“बैठो, बैठो।” मास्सिमो ने चाकू से दो स्टूलों की तरफ़ इशारा किया। “कुछ खाया?”

“हम ठीक हैं,” लेओ बोला।

“तुम दुबले हो। दोनों। मुझे फ़िक्र होती है।” मास्सिमो ने चाकू रखा और हाथ से मोर्ताडेला की चार स्लाइस काटीं, हर एक इतनी पतली कि लेओ को उसके आर-पार काउंटर दिख रहा था। उसने उन्हें काग़ज़ पर रखा और उनकी तरफ़ सरका दिया। “खाओ।”

उन्होंने खाया। ये लेओ का पिछले एक महीने में खाया सबसे अच्छा खाना था। मास्सिमो के साथ दिक़्क़त यही थी।

“तो,” मास्सिमो ने कहा। “ग्यारह हज़ार चार सौ।”

“लगभग,” मार्को बोला।

“लगभग नहीं। ठीक-ठीक।” मास्सिमो ने एक छोटी नोटबुक और एक पेंसिल निकाली। उसने नोटबुक खोली नहीं। ज़रूरत नहीं थी। “नॉर्वे वाला धंधा। नॉर्वे वालों के लिए हाथ की बनी मोर्ताडेला। याद है।”

“नॉर्वे वाले तैयार नहीं थे,” मार्को बोला।

“नॉर्वे वाले तैयार थे। मोर्ताडेला मोर्ताडेला नहीं थी। वो सुपरमार्केट का सॉसेज था नए लेबल के साथ, और चिट्ठी पर मेरा नाम, क्योंकि लेओ ने साइन किया था।” मास्सिमो ने प्यार से लेओ को देखा। “तुमने साइन किया था, लेओ।”

“पता है,” लेओ बोला।

“मैं नाराज़ नहीं हूँ।”

“पता है।”

“मैं कभी नाराज़ नहीं होता। ग़ुस्सा ख़ून के लिए बुरा है।” मास्सिमो ने नोटबुक को काउंटर पर एक बार ठकठकाया। “आधी रात।”

“आज रात?” मार्को बोला।

“आज रात। ग्यारह हज़ार चार सौ, मेरे हाथ में, आधी रात तक। वरना मुझे निराशा होगी।” उसने चाकू फिर उठाया और रोशनी में घुमाया। “और जब मुझे निराशा होती है, तो मैं सॉसेज बनाता हूँ। मेरा मन नहीं होता। सॉसेज में पूरा दिन लगता है। खोल, पिसाई, बँधाई। सबके लिए बहुत मेहनत का काम है।”

किसी ने कुछ नहीं कहा। चाकू पत्थर पर चलता रहा। श्फ़्फ़। श्फ़्फ़।

“और आज के दिन तो ख़ास तौर पर,” मास्सिमो ने कहा, “मेरे पास निराशा के लिए वक़्त नहीं है। मेरी धर्म-बेटी की आज दोपहर शादी है।”

मार्को ने अपनी मोर्ताडेला नीचे रख दी।

“जूलिया,” मास्सिमो ने कहा। “बपतिस्मा के वक़्त मैंने उसे गोद में लिया था। पूरे वक़्त चीख़ती रही, कमाल की लड़की। आज वो नेपल्स के एक बहुत भले लड़के से शादी कर रही है। बहुत तमीज़दार। मेरी मोर्ताडेला कभी नहीं खाता।” वो चाकू की तरफ़ देखकर मुस्कुराया। “मैंने ध्यान दिया है। मैं हर चीज़ पर ध्यान देता हूँ। रिसेप्शन होटल बेला विस्ता में है। चार सौ तोर्तेल्लीनी। भरावन मैंने ख़ुद बनाया है।”

“बेला विस्ता,” मार्को बोला। उसकी आवाज़ पतली निकली। उसने उसे नीचे किया। “प्यारा होटल है।”

“घटिया होटल है। झूमर ख़ूबसूरत है।” मास्सिमो काउंटर के चारों तरफ़ से आया और एक हाथ से उनके लिए शटर उठा दिया। “आधी रात, सज्जनो। भगवान तुम्हारे साथ हो। हैम का ध्यान रखना।”

बाहर क्वाद्रिलातेरो जाग रहा था। सफ़ेद एप्रन पहने आदमी पत्थरों पर पाइप से पानी मार रहे थे। एक औरत आड़ुओं का पिरामिड बना रही थी।

मार्को जेबों में हाथ डाले तेज़-तेज़ चलता रहा, जब तक वो मोड़ पार नहीं कर गए। फिर वो एक पोर्टिको के नीचे रुका, एक खंभे से टिका, और ऐसे साँस लेने लगा जैसे कोई मीनार चढ़कर आया हो।

“बेला विस्ता,” लेओ बोला।

“पता है।”

“हमारी शादी उसकी शादी है।”

“पता है, लेओ।”

“वो गॉडफ़ादर है।”

“वो एक गॉडफ़ादर है। फ़र्क़ है। ये बपतिस्मा वाला है। ये धार्मिक उपाधि है। वो दूसरी वाली चीज़ नहीं।” मार्को ने एक ऐसे रूमाल से चेहरा पोंछा जो किसी चीज़ से मेल नहीं खाता था। “बल्कि, ये तो और अच्छा है।”

“और अच्छा कैसे है?”

“सोचो। हमें क्या चाहिए?”

“ग्यारह हज़ार चार सौ।”

“और वो कहाँ है?” मार्को ने आवाज़ धीमी की। “कार्ला रॉसी, वो बैंगनी बालों वाली बूढ़ी औरत, गुरुवार को बेकरी में पूरी लाइन को बता रही थी। परिवार ने कल रात रिहर्सल डिनर पर लिफ़ाफ़े दिए। पहले वाले। बुआएँ, मामा-चाचा। साठ से ज़्यादा लिफ़ाफ़े, लेओ। उसने साठ कहा। एक डिब्बे में। होटल के ऑफ़िस में, हिफ़ाज़त के लिए, शादी तक।”

“तो हम लिफ़ाफ़े चुराएँगे।”

“हम लिफ़ाफ़े उधार लेंगे। और तुम्हें क्या लगता है, डिनर पर सबसे बड़ा लिफ़ाफ़ा किसने दिया होगा? गॉडफ़ादर कौन है?”

लेओ ने सोचा।

“तो हम उसे पैसे देंगे,” लेओ बोला, “उसी के पैसे से।”

“ये गोल है।” मार्को की आँखें चमक उठी थीं। “ये परफ़ेक्ट है। पैसा उससे निकलता है और उसी के पास लौट आता है। कुछ नहीं खोता। ये अर्थ का एक बंद तंत्र है। एको रो पड़ते।”

“एको मर चुके हैं।”

“तो और ज़्यादा रोते।”

लेओ ने खंभे को देखा। किसी ने बहुत पहले उस पर मार्कर से लिखा था: सब कुछ जुड़ा हुआ है। उसके नीचे, दूसरे मार्कर से: नहीं, नहीं है।

लेओ जो चाहता था वो उलझा हुआ नहीं था। उसकी बुआ का वाया पिएल्ला पर एक ग्राउंड फ़्लोर था जो छह साल से ख़ाली पड़ा था। उसका दरवाज़ा चौड़ा था और फ़र्श कंक्रीट का। वहाँ साइकिल ठीक करने की अच्छी दुकान बन सकती थी। वो चेन ठीक करेगा, पहिये सीधे करेगा, और फिर कभी नॉर्वे के बारे में किसी चिट्ठी पर साइन नहीं करेगा। बस इतना। पूरा प्लान बस इतना था।

“ठीक है,” लेओ बोला।

सुबह 7:40 पर होटल बेला विस्ता ऐसा लग रहा था जैसे किसी रसोई में आग लगी हो, बस आग के बिना।

बिजली लौट आई थी। नाश्ते का कमरा आधे-अधूरे शादी के कपड़ों में लोगों से भरा था, जो कॉफ़ी को लेकर दोस्ताना ढंग से एक-दूसरे पर चिल्ला रहे थे। लॉबी में दो आदमियों को किसी ने नहीं देखा, क्योंकि लॉबी में हर कोई किसी और को ढूँढ़ रहा था।

फ़्रंट डेस्क के पीछे होटल की जैकेट पहने एक नौजवान एक बड़ी हरी किताब पर सिर रखे सो रहा था।

मार्को डेस्क के पीछे ऐसे गया जैसे वहीं काम करता हो। लेओ उसके पीछे ऐसे गया जैसे नहीं करता हो। पीछे वाले ऑफ़िस का दरवाज़ा खुला था।

अंदर छतरियाँ थीं, एक बच्चे का जूता, और दो डिब्बे।

पहला डिब्बा मेज़ पर था। वो सफ़ेद था और रेशम में लिपटा, रिबन के साथ, ऊपर एक दरार, और चाँदी के अक्षर जिन पर लिखा था जूलिया & मात्तेओ।

दूसरा डिब्बा शेल्फ़ पर था, एक सफ़ेद मेज़पोश के नीचे। वो गोल और ऊँचा था। उससे काग़ज़ का एक टैग लटक रहा था।

मार्को ने फुसफुसाकर टैग पढ़ा। “रॉसी। शादी का तोहफ़ा।”

“सवाल का निशान है,” लेओ फुसफुसाया।

“बिल्कुल।”

“बिल्कुल क्या?”

“रेशम वाला डिब्बा बहुत ज़ाहिर है। कोई भी रेशम वाला डिब्बा उठा लेगा। वो चारा है, लेओ। बेवकूफ़ों के लिए।” मार्को ने मेज़पोश का एक कोना उठाया, देखा, और फ़ौरन गिरा दिया, जैसे कोई निजी चीज़ देख ली हो। “असली पैसा हमेशा मेज़पोश के नीचे होता है। सवाल का निशान ही इशारा है।”

“रेशम वाले डिब्बे में लिफ़ाफ़ों के लिए दरार है।”

“चारे में भी होती।”

लेओ ने मुँह खोला। मार्को गोल वाली चीज़ उठा चुका था, मेज़पोश समेत। वो लड़खड़ाया।

“भारी है,” मार्को ख़ुश होकर फुसफुसाया। “साठ लिफ़ाफ़े। लेओ। इन्होंने सिक्के डाले हैं।”

वो पीछे के रास्ते से निकले, एक तंग सीढ़ी से जिसमें वाइन और फ़र्श के साबुन की गंध थी। आधी सीढ़ी पर एक नौजवान ऊपर उनकी तरफ़ आ रहा था।

उसने होटल का ड्रेसिंग गाउन पहना था और एक मोज़ा। उसकी बग़ल में एक नोटबुक दबी थी और दोनों हाथों में एक काग़ज़ का नैपकिन, और वो नैपकिन को बड़े ध्यान से पढ़ रहा था, होंठ हिलाता हुआ। उसने उन्हें नहीं देखा। उन्होंने उसे नहीं देखा। वो उनके पास से निकला, दूसरी सीढ़ियों से नीचे, जो तहख़ाने में जाती थीं, और उन्होंने एक ताले में चाबी घूमने की आवाज़ सुनी।

किसी ने कुछ नहीं कहा। शादी वाले होटल में हर कोई वहीं का होता है।

फ़िआट मार्को के कज़िन की थी, जिसे पता नहीं था। वो तीसरी कोशिश में स्टार्ट हुई। मार्को चला रहा था। लेओ बग़ल वाली सीट पर बैठा था, गोल चीज़ घुटनों पर, अब भी मेज़पोश के नीचे, और पोर्टिको गुज़रते देख रहा था, मेहराब के बाद मेहराब के बाद मेहराब।

मार्को गुनगुना रहा था। ये द गॉडफ़ादर की धुन थी।

उसके नीचे लेओ को कुछ और सुनाई दे रहा था। वो मार्को से गहरा था। वो मेज़पोश से होकर उसके घुटनों में, उसके हाथों में आ रहा था।

उसने अपनी हथेली डिब्बे के ऊपर सपाट रख दी।

वो गर्म था। धूप में छोड़ी गई चीज़ जैसा गर्म नहीं। ऐसी चीज़ जैसा गर्म जो जागी हुई हो।

“मार्को,” लेओ बोला।

“हम्म।”

“पैसा गर्म क्यों है?”

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